नयी दिल्ली, पांच अगस्त (भाषा) पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने बुधवार को कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की चुनौती से निपटने के लिए वैज्ञानिक प्रबंधन, संस्थागत समन्वय, प्रौद्योगिकी आधारित निगरानी और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी वाले संतुलित दृष्टिकोण की जरूरत है।
यादव ने यह टिप्पणी पर्यावरण मंत्रालय की संसदीय परामर्शदात्री समिति की बैठक में की।
यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में लोगों और वन्यजीवों के बीच बचाव, जोखिम कम करने और दीर्घकालिक सह-अस्तित्व को मजबूत करने के लिए आवश्यक उपायों पर चर्चा की गई।
बैठक में समिति को तमिलनाडु के कोयंबटूर में मानव-वन्यजीव संघर्ष पर उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना के बारे में जानकारी दी गई।
यह केंद्र मानव-वन्यजीव संघर्ष के प्रभावी प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी नवाचार, नीतिगत सहयोग, क्षमता निर्माण और समुदाय केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने वाला राष्ट्रीय संस्थान है।
समिति ने 10 जुलाई को शुरू किए गए राष्ट्रीय मानव-वन्यजीव संघर्ष पोर्टल का भी उल्लेख किया। यह पोर्टल संघर्ष की घटनाओं को दर्ज करने, आंकड़ों के प्रबंधन, ज्ञान साझा करने और निर्णय लेने में सहायता के लिए एकीकृत डिजिटल मंच के रूप में काम करेगा।
यादव ने जोर देकर कहा कि ये पहल आंकड़ों पर आधारित रणनीतियां तैयार करने, ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने और राज्यों को बेहतर तौर-तरीके अपनाने में मदद करने के लिए महत्वपूर्ण संस्थागत ढांचा उपलब्ध कराएंगी।
बैठक में असम, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधियों ने भी प्रस्तुतियां दीं।
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शुभम पवनेश
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