नयी दिल्ली, 20 जून (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने निर्वाचन आयोग के उस नियम को सही ठहराया है जिसके तहत ‘आदर्श आचार संहिता’ (एमसीसी) के लागू होने पर दिल्ली मेट्रो में राजनीतिक विज्ञापनों की अनुमति नहीं है।
न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव और न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की पीठ ने कहा कि कुछ समय के लिए राजनीतिक विज्ञापनों पर रोक लगाने का मतलब कारोबार करने पर ‘पूरी तरह से रोक’ नहीं है, और न ही यह अनुच्छेद 19 (1) के तहत अभिव्यक्ति की आजादी का उल्लंघन है।
पीठ उन कंपनियों के समूह की याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिनके पास दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) में विज्ञापन के अधिकार हैं, जिसमें ट्रेनों के अंदर और बाहर विज्ञापन का अनुबंध शामिल हैं।
याचिका में एक एकल न्यायाधीश के जनवरी 2020 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें आचार संहिता लागू रहने के दौरान मेट्रो स्टेशन और ट्रेन में राजनीतिक विज्ञापनों के प्रदर्शन पर डीएमआरसी की रोक को सही ठहराया गया था।
कंपनियों के वकील ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग ने जून 2019 में डीएमआरसी को एक पत्र जारी कर कहा था, ‘‘आदर्श आचार संहिता की अवधि के दौरान वाणिज्यिक विज्ञापन के लिए लीज पर दी गई जगह पर कोई भी राजनीतिक विज्ञापन नहीं दिखाया जाएगा।’’
इसमें कहा गया, ‘‘अगर दी गई जगह पर कोई राजनीतिक विज्ञापन है, तो आदर्श आचार संहिता लागू होने पर उसे तुरंत हटा दिया जाएगा।’’
वकील ने तर्क दिया कि निर्वाचन आयोग का निर्देश संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करता है क्योंकि आचार संहिता के प्रभाव में रहने के दौरान राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों द्वारा चुनाव प्रचार के लिए बस स्टॉप आदि के उपयोग पर कोई प्रतिबंध नहीं है। 19 जून के आदेश में पीठ ने कहा, ‘‘अपीलकर्ताओं (कंपनियों) के व्यवसाय करने पर कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं है। वे आदर्श आचार संहिता लागू रहने के दौरान भी गैर-राजनीतिक प्रकृति के विज्ञापन प्रदर्शित करने के लिए स्वतंत्र हैं।
भाषा संतोष अविनाश
अविनाश