बांग्लादेश की अवामी लीग सरकार चाहती है कि सभी दल चुनाव में शामिल हों : रज्जाक

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बांग्लादेश की अवामी लीग सरकार चाहती है कि सभी दल चुनाव में शामिल हों : रज्जाक

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  • Publish Date - June 10, 2023 / 09:39 PM IST,
    Updated On - June 10, 2023 / 09:39 PM IST

(जयंत रॉय चौधरी)

कोलकाता, 10 जून (भाषा) बांग्लादेश के कृषि मंत्री मोहम्मद अब्दुर रज्जाक ने कहा है कि अवामी लीग के नेतृत्व वाली सरकार चाहती है कि सभी राजनीतिक दल अगले साल होने वाले संसदीय चुनाव लड़ें, लेकिन चुनाव के दौरान कार्यवाहक सरकार नहीं बनेगी जैसा कि मुख्य विपक्षी दल बीएनपी चाहता है।

रज्जाक ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि चुनाव प्रक्रिया में बाधा डालने वालों के वीजा पर प्रतिबंध लगाने की अमेरिका की घोषणा से गलत संदेश जाता है।

उन्होंने लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सेना के हस्तक्षेप की संभावना को भी खारिज कर दिया, जैसा कि उसने 1975 में तख्तापलट करके किया था।

अवामी लीग के वरिष्ठ नेता रज्जाक ने कहा, ‘‘हम कोशिश कर रहे हैं कि अगले साल स्वतंत्र और निष्पक्ष ढंग से चुनाव संपन्न कराने के लिए सभी पार्टियां साथ आएं, … हमें अब भी उम्मीद है कि ऐसा होगा।’’

बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन ने जातीय संसद या संसद के लिए 2014 के चुनावों का बहिष्कार किया था। शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग ने 2019 में जबरदस्त जीत हासिल की थी जबकि बीएनपी ने सिर्फ सात सीटों पर जीत दर्ज की थी।

विपक्ष ने आरोप लगाया कि 2019 के नतीजों में ‘‘बड़े पैमाने पर धांधली’’ हुई थी।

मंत्री ने कहा, ‘‘हमारी प्रधानमंत्री ने 2014 में बीएनपी प्रमुख बेगम खालिदा जिया से संपर्क किया था, और एक सर्वदलीय सरकार की पेशकश की थी। लेकिन, वह चुनाव प्रक्रिया के बहिष्कार पर अड़ी रहीं।’’

रज्जाक ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में बाधा डालने वालों के वीजा पर प्रतिबंध लगाने की अमेरिका की घोषणा से गलत संदेश जाता है। उन्होंने कहा, ‘‘हमने यह पता लगाने की कोशिश की है कि वे (अमेरिका) क्या चाहते हैं, लेकिन वे कोई जवाब नहीं दे पाए हैं।’’

उन्होंने कहा कि उनकी सरकार हमेशा चुनाव प्रक्रिया पर किसी से भी बात करने को तैयार है।

रज्जाक ने अपने देश में किसी भी राजनीतिक गतिरोध में सेना के हस्तक्षेप की संभावना से इनकार किया।

देश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान की हत्या के बाद तख्तापलट का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘सेना देश का अधिक राष्ट्रवादी हिस्सा बन गई है और इसमें मुक्ति-विरोधी तत्व नहीं हैं जो 1975 में मौजूद थे।’’

भाषा

देवेंद्र अविनाश

अविनाश