पटियाला, 24 अक्टूबर (भाषा) साल 1995 में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में दोषी बलवंत सिंह राजोआणा ने शुक्रवार को कहा कि उसने लगभग 30 साल जेल में बिताए हैं और मृत्युदंड के खिलाफ उसकी दया याचिका पर फैसला आना चाहिए।
राजोआणा को इलाज के लिए यहां सरकारी डेंटल कॉलेज लाया गया था।
कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच अस्पताल ले जाते समय, राजोआणा ने कहा कि उसने लगभग 30 साल जेल में बिताए हैं, जिसमें मौत की सजा सुनाए जाने के बाद 19 साल का कारावास भी शामिल है।
राजोआणा ने एक सवाल के जवाब में यह भी कहा कि उसकी दया याचिका भी 14 साल से लंबित है। उसने कहा, ‘‘मैं कहना चाहता हूं कि इस पर फैसला लिया जाना चाहिए।’’
उसने कहा कि उच्चतम न्यायालय पिछले पांच साल से केंद्र सरकार से इस संबंध में फैसला लेने के लिए कह रहा है।
पिछले महीने, उच्चतम न्यायालय ने पूछा था कि केंद्र द्वारा इसे ‘गंभीर अपराध’ बताए जाने के बाद भी राजोआणा को अब तक फांसी क्यों नहीं दी गई।
शीर्ष अदालत राजोआणा की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें उसकी दया याचिका पर फैसले में देरी के आधार पर उसकी मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदलने की मांग की गई थी।
गत 20 जनवरी को, उच्चतम न्यायालय ने केंद्र से उसकी दया याचिका पर निर्णय लेने को कहा।
तब केंद्र ने मामले की संवेदनशीलता का हवाला देते हुए कहा था कि दया याचिका विचाराधीन है।
पिछले साल 25 सितंबर को, न्यायालय ने राजोआणा की याचिका पर केंद्र, पंजाब सरकार और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासन से जवाब मांगा था।
चंडीगढ़ स्थित सिविल सचिवालय के प्रवेश द्वार पर 31 अगस्त, 1995 को हुए एक विस्फोट में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह और 16 अन्य मारे गए थे। एक विशेष अदालत ने जुलाई, 2007 में राजोआणा को मौत की सजा सुनाई थी।
उच्चतम न्यायालय ने 3 मई, 2023 को, उसकी मौत की सजा को कम करने से इनकार कर दिया और कहा कि सक्षम प्राधिकारी उसकी दया याचिका पर विचार कर सकता है।
मार्च 2012 में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) ने उसकी ओर से संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत एक दया याचिका दायर की थी।
भाषा वैभव माधव
माधव