मुंबई, 23 जून (भाषा) देश की आर्थिक राजधानी मुंबई स्थित किंग एडवर्ड मेमोरियल (केईएम) अस्पताल का नाम बदलने का प्रस्ताव रखने वाले महाराष्ट्र के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने मंगलवार को ब्रिटिश राजा किंग एडवर्ड को ‘किंग कसाब’ की संज्ञा दी। लोढ़ा ने कहा कि किंग एडवर्ड ने ‘‘भारत को लूटा और लाखों भारतीयों की हत्या की’’।
राज्य विधान परिषद में भाजपा नेता लोढ़ा ने यह भी कहा कि जो लोग ‘किंग एडवर्ड’ का समर्थन करते हैं, उनकी निंदा की जानी चाहिए।
हालांकि, उद्योग मंत्री उदय सामंत ने कहा कि अस्पताल का नाम बदलने को लेकर अभी कोई फैसला नहीं किया गया है। यह अस्पताल नगर निकाय द्वारा संचालित है।
मध्य मुंबई के परेल इलाके में स्थित किंग एडवर्ड मेमोरियल अस्पताल का नाम ब्रिटिश राजा किंग एडवर्ड सप्तम के सम्मान में रखा गया था। वह महारानी विक्टोरिया के सबसे बड़े बेटे थे और उन्होंने 1901 से 1910 तक शासन किया था।
अस्पताल की वेबसाइट के अनुसार, 1926 में स्थापित और 1800 बिस्तरों वाले इस अस्पताल को मुख्य रूप से बृहन्मुंबई नगरपालिका परिषद (बीएमसी) से वित्तीय सहयोग प्राप्त होता है।
शिवसेना (उद्धव बालासाहब ठाकरे) के विधान पार्षद मिलिंद नार्वेकर ने केईएम का नाम बदलने के संबंध में एक सवाल पूछा।
उनकी पार्टी केईएम अस्पताल का नाम बदलने के लोढ़ा के प्रस्ताव का जोरदार विरोध कर रही है। लोढ़ा राज्य के कौशल विकास मंत्री हैं।
परिषद में शिवसेना (उबाठा) सदस्य सचिन अहीर ने मांग की कि लोढ़ा परिवार से जुड़ी संपत्तियों ‘ट्रंप टॉवर’ और ‘वर्ल्ड वन’ का नाम भी बदला जाए।
लोढ़ा ने जवाब में कहा कि जब वह केईएम अस्पताल गए थे, तो उन्होंने तीन (नये) नामों का सुझाव दिया था, क्योंकि वहां के लोगों ने उनसे ऐसा करने का अनुरोध किया था।
लोढ़ा ने कहा कि किंग एडवर्ड ने कोई पैसा नहीं दिया और भारत को लूटा। उन्होंने कहा कि वह ‘‘किंग कसाब’’ था और उसने लाखों भारतीयों को मारा।’’ उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग किंग एडवर्ड का समर्थन करते हैं, उनकी निंदा की जानी चाहिए।
लोढ़ा का इशारा साफतौर पर अजमल कसाब की ओर था, जो 2008 में मुंबई में हुए भयानक हमलों के बाद ज़िंदा पकड़ा गया एकमात्र पाकिस्तानी आतंकवादी था। उसे नवंबर 2012 में फांसी दी गई थी।
राज्य विधान परिषद में एक सवाल के लिखित जवाब में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि बीएमसी को केईएम अस्पताल का नाम बदलने का अनुरोध मिला है और इस पर अभी कोई फ़ैसला नहीं लिया गया है।
भाषा सुरेश अविनाश
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