उलानबातर, 23 जून (भाषा) विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को मंगोलिया के मुख्य कैबिनेट सचिव बट्टुमुर एनखबयार से मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने के तरीकों पर चर्चा की, जिसमें खनन, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और मानव संसाधन जैसे नए क्षेत्र शामिल हैं।
जयशंकर दो देशों की यात्रा के पहले चरण में मंगोलिया में हैं।
उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “आज शाम मंगोलिया के मंत्री और मुख्य कैबिनेट सचिव बट्टुमुर एनखबयार से मिलकर खुशी हुई। हमने खनन, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और मानव संसाधन जैसे क्षेत्रों में नए अवसरों सहित हमारे आपसी सहयोग पर चर्चा की।”
बैठक में एनखबयार ने कहा कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने में जयशंकर की मंगोलिया यात्रा “बेहद महत्वपूर्ण” है।
एनखबयार ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “हम सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम मेधा अनुप्रयोगों और डिजिटल गवर्नेंस के विकास की दिशा में भारत के साथ सहयोग बढ़ाने में रुचि रखते हैं।”
उन्होंने कहा, “मंगोलिया और भारत के बीच सहयोग के तहत कई क्षेत्रों में असरदार परियोजना और कार्यक्रम लागू किए जा रहे हैं। इनमें से एक है भारत सरकार के सहयोग से चल रही तेल रिफाइनरी परियोजना।”
उन्होंने मंगोलिया की ऊर्जा स्वतंत्रता सुनिश्चित करने में इसके महत्व पर जोर दिया और कई क्षेत्रों में विकसित हो रहे प्रभावी सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
जयशंकर ने मंगलवार को मंगोलिया में भारत की मदद से बन रही 1.7 अरब डॉलर की रिफाइनरी परियोजना के निर्माण स्थल का दौरा किया और इस “अहम मैत्री पहल” के तहत जारी काम की समीक्षा की।
‘एक्स’ पर एक पोस्ट में, जयशंकर ने कहा कि उन्होंने अपनी मंगोलियाई समकक्ष बैटसेटसेग बटमुंख और उद्योग एवं खनन मंत्री गोंगोर डमदिनन्याम के साथ मंगोल रिफाइनरी परियोजना के निर्माण स्थल का दौरा किया।
उन्होंने कहा, “भारत-मंगोलिया मैत्री की यह अहम परियोजना लगातार आगे बढ़ रही है। इसमें शामिल अलग-अलग टीमों के साथ जारी कामों की स्थिति की समीक्षा की गई।”
जयशंकर ने परियोजना स्थल पर भारतीय और मंगोलियाई कर्मचारियों से भी बातचीत की और मुश्किल हालात में इतनी बड़ी परियोजना को पूरा करने में उनके “समर्पण और प्रतिबद्धता” के लिए उन्हें धन्यवाद दिया।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, ‘मंगोल ऑयल रिफाइनरी प्रोजेक्ट’ को भारत सरकार द्वारा दी गई 1.7 अरब अमेरिकी डॉलर की ‘ऋण सुविधा’ की मदद से लागू किया जा रहा है और यह “मंगोलिया की टिकाऊ ऊर्जा रणनीति का एक अहम हिस्सा और प्रमुख पहल” है।
जयशंकर ने उलानबातर में गंडांटेगचिनलेन मठ का भी दौरा किया।
जयशंकर दो देशों की यात्रा के पहले चरण में मंगोलिया में हैं।
मंगोलिया से, जयशंकर अपनी यात्रा के आखिरी चरण के लिए बुधवार को कोरिया गणराज्य जाएंगे।
भाषा प्रशांत माधव
माधव