शांतिदूत बनने से पाकिस्तान अपनी अतीत की करतूतों के सबूत नहीं मिटा पाएगा: थरूर

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शांतिदूत बनने से पाकिस्तान अपनी अतीत की करतूतों के सबूत नहीं मिटा पाएगा: थरूर

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  • Publish Date - April 11, 2026 / 08:07 PM IST,
    Updated On - April 11, 2026 / 08:07 PM IST

नयी दिल्ली, 11 अप्रैल (भाषा) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हो रही उच्च स्तरीय शांति वार्ता के बीच शनिवार को कहा कि वह इस मुद्दे पर भारत को पाकिस्तान के साथ प्रतिस्पर्धा में नहीं देखते और शांति बहाली में कौन योगदान देता है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।

थरूर ने इस बात पर जोर दिया कि यदि पाकिस्तान किसी विशिष्ट संदर्भ में शांतिदूत के रूप में उभरता है, तो वह अपनी पिछली करतूतों के सबूत नहीं मिटा पाएगा।

थरूर ने संवाददाताओं से कहा कि पाकिस्तान इस पूरे मामले में इसलिए शामिल है क्योंकि उसकी ईरान के साथ 900 किलोमीटर लंबी सीमा है और वहां शिया आबादी भी काफी है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि अगर संघर्ष बढ़ा तो सभी शरणार्थी पाकिस्तान आ जाएंगे और इसलिए इस मामले में उसकी भागीदारी भारत से अलग है।

उन्होंने कहा, ‘जब इस मामले की बात आती है तो मुझे पाकिस्तान के साथ कोई प्रतिस्पर्धा नहीं दिखती।’

थरूर ने विश्वास व्यक्त किया कि भारत का प्राथमिक हित शांति बहाली में है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘मुझे लगता है कि जो हो रहा है, उसपर हमें बहुत सावधानी से विचार करना चाहिए। हमारी सरकार, हमारे प्रधानमंत्री, हमारे विदेश मंत्री, हमारे पेट्रोलियम मंत्री, हर कोई उस क्षेत्र के नेताओं के संपर्क में है क्योंकि यह हमारे हित में है। हम अलग होने का जोखिम नहीं उठा सकते, हमें बहुत सक्रिय रूप से शामिल होना होगा और हमें पूरी उम्मीद करनी चाहिए कि इन प्रयासों के परिणामस्वरूप शांति कायम होगी। ‘

भाषा हक पवनेश जोहेब

जोहेब