नई दिल्लीः पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने हाई-स्पीड डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर एक्सपोर्ट ड्यूटी और सेस में बढ़ोतरी की है। डीजल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी को 21.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 55.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इसके अलावा, हाई-स्पीड डीजल पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी 24 रुपये प्रति लीटर और रोड व इंफ्रास्ट्रक्चर सेस 36 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। पेट्रोल पर इस चार्ज को पहले की तरह ही शून्य रखा गया है। हालांकि सरकार के इस फैसले ले आम आदमी पर कोई असर नहीं होगा।
इस बदलाव को लेकर माना जा रहा है कि सरकार घरेलू कीमतों पर महंगाई का भार नहीं देना चाहती है, जिस कारण एक्सपोर्ट ड्यूटी में इजाफा किया है। ताकि घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल और जेट फ्यूल की उपलब्धता बनी रहे। खासकर तब जब ग्लोबल स्तर पर एनर्जी कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है। ब्रेंट कच्चे तेल का दाम लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब बना हुआ है। सरकार का यह कदम व्यापक विंडफॉल टैक्स ढांचे का हिस्सा है, जिसके तहत सरकार समय-समय पर ईंधन निर्यात पर लगने वाले शुल्क बदलती है, ताकि रिफाइनर का प्रॉफिट और स्थानीय बाजार की जरूरतों के बीच संतुलन बना रहे। हालांकि, इससे तेल कंपनियों के कारोबार पर असर हो सकता है और उनका बिजनेस ज्यादा प्रभावित होगा, जो दूसरे देशों में रिफाइन डीजल और जेट फ्यूल की सप्लाई करते थे। वहीं पेट्रोल में किसी भी तरह का बदलाव नहीं होने से पेट्रोल का कारोबार प्रभावित नहीं होगा।
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए ये शुल्क लगाए गए थे। इन शुल्कों का उद्देश्य निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कीमतों के अंतर का अनुचित लाभ उठाने से रोकना है, क्योंकि युद्ध शुरू होने के बाद से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। बता दें कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य हमले शुरू करने के बाद तेहरान की ओर से व्यापक जवाबी कार्रवाई की गई थी। हालांकि, आठ अप्रैल को ईरान, अमेरिका और इजरायल दो सप्ताह के संघर्ष विराम पर सहमत हुए, जिससे पूरे पश्चिम एशिया और वैश्विक ऊर्जा बाजार में पैदा हुआ व्यवधान फिलहाल थमा है।
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