कोलकाता, दो जुलाई (भाषा) पश्चिम बंगाल मंत्रिमंडल ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के मसौदा विधेयक की पड़ताल करने के लिए बृहस्पतिवार को उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक समिति के गठन को मंजूरी दी।
मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि समिति को मसौदा विधेयक की जांच-पड़ताल करने और अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया है।
पॉल ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद पत्रकारों से कहा, ‘‘राज्य मंत्रिमंडल ने पश्चिम बंगाल समान नागरिक संहिता (यूसीसी) 2026 के मसौदा विधेयक की पड़ताल के लिए एक समिति के गठन को मंजूरी दे दी है। न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति को इसके लिए चार सप्ताह का समय दिया गया है, जिसके बाद इसे विधानसभा में पेश किया जायेगा।’’
यह निर्णय सोमवार को विधानसभा में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की उस घोषणा के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि सरकार यूसीसी ढांचे को आगे बढ़ाएगी, जो 2026 के विधानसभा चुनावों में भाजपा के प्रमुख वादों में से एक था।
प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, विरासत और दत्तक ग्रहण को नियंत्रित करने के लिए एक समान नागरिक ढांचा बनाना है।
यदि अगस्त में होने वाले बजट सत्र के दौरान इसे पेश कर पारित कर दिया जाता है, तो पश्चिम बंगाल देश का चौथा राज्य बन जायेगा जो यूसीसी को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
भाजपा नेताओं ने कहा कि यह प्रस्ताव विभिन्न समुदायों के बीच समान नागरिक अधिकार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से है और इसे धार्मिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए।
राज्य भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने हाल में जनजातीय समुदायों के बीच उठी चिंताओं को दूर करने की कोशिश करते हुए कहा था कि संवैधानिक प्रावधानों के तहत मान्यता प्राप्त अनुसूचित जनजातियां प्रस्तावित कानून के दायरे से बाहर रहेंगी और उनकी परंपराएं, रीति-रिवाज तथा विशेष सुरक्षा प्रावधान बिना किसी बदलाव के जारी रहेंगे।
उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण उपायों से प्रस्तावित विधेयक को जोड़ने वाली अटकलों को भी खारिज करते हुए कहा था कि ऐसे प्रावधान न तो प्रस्तावित हैं और न ही सरकार द्वारा विचाराधीन यूसीसी ढांचे से उनका कोई संबंध है।
भाषा
देवेंद्र अविनाश
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