बंगाल चुनाव में एसआईआर की छाया के बीच अब तक का सर्वाधिक 92.47 प्रतिशत मतदान हुआ

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बंगाल चुनाव में एसआईआर की छाया के बीच अब तक का सर्वाधिक 92.47 प्रतिशत मतदान हुआ

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  • Publish Date - April 29, 2026 / 11:05 PM IST,
    Updated On - April 29, 2026 / 11:05 PM IST

(तस्वीरों के साथ)

कोलकाता, 29 अप्रैल (भाषा) निर्वाचन आयोग ने कहा कि बुधवार को संपन्न हुए वर्ष 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में अब तक का सर्वाधिक 92.47 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। सोमवार को चुनाव परिणामों की घोषणा से पहले ही दोनों प्रमुख दल-भाजपा और तृणमूल कांग्रेस अपनी-अपनी जीत को लेकर आत्मविश्वास से भरे दिख रहे हैं।

पश्चिम बंगाल में बुधवार को विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण में मतदान का समय समाप्त होने तक 91.66 प्रतिशत मतदान हो चुका था और खबरों के मुताबिक हजारों मतदाता अब भी अपने मत डालने के लिए कतारों में इंतजार कर रहे थे। दक्षिण बंगाल की 142 विधानसभा सीटों पर हुए दूसरे चरण के मतदान में पहले चरण के रिकॉर्ड 93.19 प्रतिशत मतदान की बराबरी होने की संभावना रही।

निर्वाचन आयोग की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में बताया गया है कि दूसरे चरण के मतदान में शाम 7.45 बजे तक 91.66 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जिससे दोनों चरणों को मिलाकर कुल मतदान प्रतिशत 92.47 प्रतिशत हो गया है। पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को हुआ था और मतगणना चार मई को होगी।

कोलकाता में लगभग 87 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जबकि पूर्वी बर्धमान जिला 92.46 प्रतिशत मतदान के साथ शीर्ष पर रहा। पश्चिम बंगाल में स्वतंत्रता के बाद मत प्रतिशत के लिहाज से यह अब तक का सबसे अधिक भागीदारी वाला विधानसभा चुनाव है।

भागीदारी के व्यापक पैमाने ने एक दूरगामी राजनीतिक संदेश दिया-राज्य के लगभग हर पात्र मतदाता ने चुनावी प्रक्रिया और उसके परिणाम में व्यक्तिगत रूप से रुचि दिखाई।

भागीदारी के विशाल पैमाने ने चुनाव के बारे में तत्काल एक राजनीतिक संदेश दिया — मतदाता उदासीन नहीं थे।

इस व्यापक राजनीतिक संघर्ष के केंद्र में भवानीपुर था, जो अब केवल दक्षिण कोलकाता का निर्वाचन क्षेत्र नहीं था, बल्कि बनर्जी का राजनीतिक गढ़, उनका भावनात्मक गृह क्षेत्र और भाजपा का चुना हुआ मनोवैज्ञानिक युद्धक्षेत्र था।

बनर्जी (71) 15 वर्षों के शासन के बाद लगातार चौथी बार सत्ता में आने की कोशिश कर रही हैं और उनका मुकाबला नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी से है।

इस प्रतिष्ठा की लड़ाई को सांकेतिक रूप से नंदीग्राम की पुनरावृत्ति के रूप में देखा जा रहा है, जहां 2021 में टीएमसी से भाजपा में शामिल होने के बाद अधिकारी ने बनर्जी को हराया था।

भवानीपुर में लगभग 87 प्रतिशत मतदान हुआ, जो 2021 के विधानसभा चुनावों में लगभग 61 प्रतिशत और उस उपचुनाव के 57 प्रतिशत मतदान से काफी अधिक है, जिसके बाद बनर्जी विधानसभा में वापस आईं।

बनर्जी ने भाजपा पर केंद्रीय बलों, पुलिस पर्यवेक्षकों और निर्वाचन अधिकारियों का इस्तेमाल करके चुनाव में धांधली करने का आरोप लगाया।

उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘‘भाजपा इस चुनाव में धांधली करना चाहती है। बंगाल में चुनाव आमतौर पर शांतिपूर्ण होते हैं। क्या यहां गुंडा राज है?’’ उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवान मंगलवार देर रात तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के घरों में घुस गए और इलाके में दहशत फैला दी।

बनर्जी ने आरोप लगाया कि चुनाव पर्यवेक्षक भाजपा के इशारे पर काम कर रहे हैं और दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं को जिलों में चुनिंदा तरीके से निशाना बनाया जा रहा है।

अधिकारी ने इन आरोपों को ‘‘हताशा’’ का संकेत बताते हुए खारिज कर दिया और दावा किया कि बनर्जी को यह एहसास हो गया है कि उन्हें ‘‘एक भी वोट’’ नहीं मिलने वाला है।

इस बीच, टीएमसी ने केंद्रीय बलों पर फाल्टा के बेलसिंघा गांव में आम मतदाताओं, विशेषकर महिलाओं पर बर्बरतापूर्ण बल प्रयोग करने का आरोप लगाया। टीएमसी ने आरोप लगाया कि मतदान केंद्र के पास भीड़ को तितर-बितर करने के प्रयास के दौरान महिलाओं की पिटाई की गई।

उधर भाजपा ने आरोप लगाया कि फाल्टा के कई मतदान केंद्रों में ईवीएम के बटनों पर टेप लगाकर पार्टी के लिए वोट डालने का विकल्प अवरुद्ध कर दिया गया था। भाजपा ने इन बूथों पर पुनर्मतदान की मांग की।

राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने कहा कि जिन बूथों पर ईवीएम से छेड़छाड़ की बात सही पाई जाएगी, वहां पुनर्मतदान की घोषणा किए जाने की संभावना है।

भाषा संतोष वैभव

वैभव