बंगाल चुनाव: नाम हटाए जाने संबंधी नयी याचिका पर न्यायालय की मंजूरी; तृणमूल, भाजपा में टकराव

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बंगाल चुनाव: नाम हटाए जाने संबंधी नयी याचिका पर न्यायालय की मंजूरी; तृणमूल, भाजपा में टकराव

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  • Publish Date - May 11, 2026 / 09:32 PM IST,
    Updated On - May 11, 2026 / 09:32 PM IST

कोलकाता, 11 मई (भाषा) तृणमूल कांग्रेस ने सोमवार को दावा किया कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर के कारण मतदाताओं के नाम हटाए जाने संबंधी नयी याचिकाओं की अनुमति देने के उच्चतम न्यायालय के फैसले ने उसके इस दावे को सही ठहराया है कि चुनाव परिणाम जनता के वास्तविक जनादेश को नहीं दर्शाते हैं क्योंकि कई विधानसभा सीट पर पार्टी की हार का अंतर ‘‘हटाए गए मतदाताओं की संख्या से कम’’ था।

इस दावे को खारिज करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कहा कि ममता बनर्जी की पूर्ववर्ती सरकार में शामिल लोग ‘‘हार को स्वीकार नहीं कर’’ पा रहे हैं। भाजपा ने कहा कि चुनावी आंकड़े दिखाते हैं कि जिन सीट पर सबसे अधिक अयोग्य मतदाताओं के नाम हटाए गए थे, वहां भाजपा नहीं बल्कि तृणमूल कांग्रेस का प्रदर्शन बेहतर रहा।

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अन्य लोग अपने इस दावे के संबंध में नए आवेदन दाखिल कर सकते हैं कि हाल में हुए विधानसभा चुनाव में 31 निर्वाचन क्षेत्रों में जीत का अंतर मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान वहां से हटाए गए मतदाताओं की संख्या से कम था।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता और तृणमूल कांग्रेस सांसद कल्याण बनर्जी द्वारा न्यायमूर्ति बागची की पूर्व टिप्पणी का हवाला देने के बाद दलीलों पर गौर किया। बनर्जी ने न्यायमूर्ति बागची की पूर्व टिप्पणी का हवाला देत हुए कहा था कि यदि विरोधियों की जीत का अंतर एसआईआर के दौरान हटाए गए नामों की संख्या से कम है, तो अदालत शिकायतों पर विचार कर सकती है। उन्होंने दावा किया कि ऐसी 31 सीट हैं।

राज्य में मतदाता सूचियों के एसआईआर से संबंधित कई याचिकाओं पर पीठ सुनवाई कर रही थी, जिनमें ममता बनर्जी द्वारा दायर एक याचिका भी शामिल थी।

कल्याण बनर्जी ने कहा, ‘‘फिलहाल, हमने अदालत का ध्यान उन 31 सीट की ओर दिलाया है जहां हमारी हार का अंतर एसआईआर के ‘विचाराधीन’ चरण के दौरान हटाए गए नामों की संख्या से कम था। इसके बाद हम अदालत को उन सीट के बारे में सूचित करेंगे जहां हार का अंतर कुल हटाए गए नामों के पांच से 20 प्रतिशत के बीच था।’’

उन्होंने दावा किया, ‘‘ऐसा करने के बाद ऐसी सीट की संख्या में काफी वृद्धि होगी जिससे हमारा यह दावा साबित हो जाएगा कि जनता का जनादेश चुनाव परिणामों में सही मायने में प्रतिबिंबित नहीं हुआ।’’

सांसद ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया ‘‘अपारदर्शी तरीके से आयोजित की गई, इसमें हेराफेरी की गई’’ और ‘‘मतदाताओं के एक विशिष्ट वर्ग को अनैतिक तरीके से निशाना बनाया गया’’, जिनके मतदान अधिकारों को छीनकर भाजपा को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।

उन्होंने कहा, ‘‘मतदान केंद्रों और ईवीएम भंडारण कक्षों में सीसीटीवी कैमरे लगे थे, जिनसे बाहर लगे मॉनिटरों को लाइव फीड मिल रही थी। लेकिन क्या मतगणना केंद्रों पर कैमरे लगे थे, जहां असली खेल चल रहा था? कम से कम 60 सीट ऐसी थीं जहां हमारे मतगणना एजेंटों को पीटा गया और उन्हें परिसर छोड़ने के लिए मजबूर किया गया।’’

कल्याण बनर्जी ने सोमवार को सोशल मीडिया पर बंगाल के मुख्य निर्वाचन आयुक्त मनोज अग्रवाल की एक तस्वीर पोस्ट की, जिसमें वह शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में मौजूद दिख रहे हैं। इस तरह उन्होंने भाजपा और निर्वाचन आयोग की मिलीभगत के अपने दावे को सही साबित करने की कोशिश की।

हालांकि, ‘पीटीआई-भाषा’ इस तस्वीर की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सकी।

उन्होंने लिखा, ‘‘मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल कैबिनेट बैठक में कैसे उपस्थित हो सकते हैं? इससे चुनाव के दौरान मुख्य निर्वाचन अधिकारी का भाजपा से गहरा संबंध साबित होता है। चुनाव तो दिखावा मात्र था और वास्तव में चुनाव भाजपा पार्टी कार्यालय द्वारा कराया गया था।’’

अपने दावों को पुख्ता करते हुए तृणमूल कांग्रेस प्रवक्ता और नवनिर्वाचित विधायक कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि चुनाव तीन कारणों से दूषित हुए हैं: ‘‘मतदाता सूची से नाम हटाना, ईवीएम में हेराफेरी और मतगणना केंद्र में हुई लूट’’।

भाजपा ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस के दावे चुनाव के आंकड़ों या निर्वाचन आयोग के मतदाता सूची से नाम हटाने के आंकड़ों से मेल नहीं खाते हैं।

भाजपा प्रवक्ता केया घोष ने कहा, ‘‘हमें 49 ऐसी सीट की जानकारी है जहां मतदाता सूची से हटाए गए नाम की संख्या उम्मीदवारों की जीत के अंतर से अधिक है। इस श्रेणी में आने वाली केवल 12 प्रतिशत सीट भाजपा को मिलीं, जबकि तृणमूल ने इनमें से 26 प्रतिशत सीट जीतीं। वास्तव में, इस चुनाव में कांग्रेस द्वारा जीती गई दोनों सीट इसी श्रेणी में आती हैं जिससे उनकी जीत का दर 100 प्रतिशत हो जाता है।’’

‘एक्स’ पर पहले किए गए एक पोस्ट में भाजपा के आईटी प्रकोष्ठ के प्रमुख अमित मालवीय ने दावा किया था कि एसआईआर के दौरान अयोग्य मतदाताओं के नाम जिन पांच विधानसभा क्षेत्रों में सबसे अधिक हटाए गए उनमें तृणमूल कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। इसके विपरीत जिन सीट पर सबसे कम नाम हटाए गए उस पर भाजपा ने जीत दर्ज कीं।

भाषा सुरभि संतोष

संतोष