बंगाल: रिताब्रता को नेता विपक्ष बनाने के बागी विधायकों के प्रयास को ‘आधिकारिक’ तृणमूल ने खारिज किया

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बंगाल: रिताब्रता को नेता विपक्ष बनाने के बागी विधायकों के प्रयास को ‘आधिकारिक’ तृणमूल ने खारिज किया

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  • Publish Date - June 3, 2026 / 03:51 PM IST,
    Updated On - June 3, 2026 / 03:51 PM IST

कोलकाता, तीन जून (भाषा) तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ नेताओं के एक धड़े ने बुधवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस से मुलाकात कर निष्कासित पार्टी नेता रिताब्रता बनर्जी को नेता विपक्ष बनाए जाने के समर्थन में 58 विधायकों के हस्ताक्षरयुक्त पत्र सौंपने वाले बागी विधायकों के कदम को खारिज कर दिया।

इस धड़े ने खुद को पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी से अधिकार प्राप्त होने का दावा किया है।

यह घटनाक्रम टीएमसी के बागी विधायकों के एक समूह द्वारा विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस को विपक्ष के नेता के पद के लिए रिताब्रता बनर्जी के समर्थन में 58 विधायकों के पत्र सौंपे जाने के बाद सामने आया।

इस नाटकीय घटनाक्रम से तृणमूल की विधानसभा इकाई दो हिस्सों में बंटती दिखाई दे रही है। इसकी तुलना 2022 में महाराष्ट्र में हुई शिवसेना की टूट से की जा रही है, जब एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट ने मूल पार्टी से अलग होकर भाजपा के समर्थन से सरकार बनाई थी।

नया गुट अब खुद को प्रमुख विपक्षी दल का दर्जा देने का दावा कर रहा है।

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा, ‘नियमों तहत सवाल यह है कि, एआईटीसी (अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस) की ओर से यह पत्र किसने सौंपा? विधायकों को ऐसा करने का अधिकार नहीं है। अभिषेक बनर्जी का पत्र ही विधानसभा अध्यक्ष को सौंपा गया एकमात्र वैध पत्र है। यह कदम कानूनी रूप से सही नहीं है।’

उन्होंने कहा, ‘रिताब्रता बनर्जी और असंतुष्ट विधायकों को संगठित करने वाले संदीपन साहा को दो दिन पहले ही पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था और उनके निष्कासन पत्र सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं।’

बागी टीएमसी विधायकों ने निष्कासित विधायक संदीपन साहा, सिउली साहा और जावेद खान को उप नेता प्रतिपक्ष तथा रघुनाथगंज के विधायक अखरुज्जमान को मुख्य सचेतक बनाने का भी समर्थन किया।

यह कदम टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी द्वारा विधानसभा अध्यक्ष को नया पत्र भेजे जाने के 24 घंटे के अंदर उठाया गया।

बनर्जी के पत्र में पार्टी के निर्णय को दोहराते हुए शोभनदेब चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष नियुक्त करने की बात कही गई थी।

पत्र में आशिमा पात्रा और नयना बंद्योपाध्याय को उप नेता प्रतिपक्ष तथा फिरहाद हाकिम को मुख्य सचेतक बनाने का भी समर्थन किया गया था।

साथ ही विधानसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया गया था कि दशकों से चली आ रही विधानसभा की परंपरा के आधार पर इन नियुक्तियों को मान्यता दी जाए।

मंगलवार को टीएमसी विधायक कुणाल घोष और आशिमा पात्रा ने यह पत्र व्यक्तिगत रूप से अध्यक्ष को सौंपने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि बोस की अनुपस्थिति में उनके कार्यालय सचिव ने पत्र लेने से इनकार कर दिया।

सचिव ने कथित रूप से कहा कि उन्हें मौखिक निर्देश मिले हैं कि टीएमसी से कोई पत्र स्वीकार न किया जाए।

बाद में घोष ने कहा कि उन्होंने अभिषेक बनर्जी का पत्र अध्यक्ष के कार्यालय की मेज पर छोड़ दिया तथा उसे ई-मेल व पंजीकृत डाक के माध्यम से भी भेजा।

घोष ने सवाल किया, ‘यदि इन बागी विधायकों को पार्टी द्वारा आधिकारिक रूप से तय किए गए नामों पर इतनी आपत्ति थी, तो उन्होंने उस बैठक में यह मुद्दा क्यों नहीं उठाया, जिसमें ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी दोनों मौजूद थे?’

भाषा जोहेब पवनेश

पवनेश