बेंगलुरु, तीन जून (भाषा) वरिष्ठ कांग्रेस नेता जी परमेश्वर ने बुधवार को कहा कि उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद अब उनके अनुभव की उपेक्षा या उनके साथ किसी प्रकार का अन्याय किए जाने का कोई सवाल ही नहीं उठता।
परमेश्वर ने पत्रकारों से बातचीत में उन अटकलों को खारिज किया कि उन्हें नेतृत्व व्यवस्था में हाशिये पर रखा गया है। उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने उन्हें एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है, जिसे उन्होंने स्वीकार किया है।
उन्होंने कहा, ‘‘मेरे अनुभव की उपेक्षा का कोई सवाल ही नहीं है।’’
कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि वह पार्टी के फैसले के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और उपमुख्यमंत्री पद को जनता की सेवा का अवसर मानते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘हां, मुझे भी मुख्यमंत्री बनने की इच्छा थी, लेकिन जो भी फैसला पार्टी का शीर्ष नेतृत्व लेता है, हमें एक अनुशासित कार्यकर्ता की तरह उसे स्वीकार करना चाहिए।’’
उन्होंने पार्टी नेतृत्व का आभार जताते हुए कहा कि उनपर जो भरोसा जताया गया है, उसके लिए वह आभारी हैं।
परमेश्वर ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया जाना उनके लिए राज्य की सेवा का एक नया अवसर है। उन्होंने कहा, ‘‘मैं इसे राज्य के लोगों की सेवा का एक और अवसर मानता हूं, हमारी पार्टी की विचारधारा और घोषणापत्र के अनुरूप काम करने का अवसर।’’
जब उनसे पूछा गया कि मुख्यमंत्री पद की दौड़ में रहने के बाद उपमुख्यमंत्री पद से वह संतुष्ट हैं या नहीं, तो उन्होंने कहा कि जनसेवा किसी भी पद से अधिक महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा, ‘‘क्या कोई भी पद अच्छा नहीं है, यदि वह (पद) लोगों और राज्य की सेवा का अवसर देता है? यह एक अवसर है।’’
परमेश्वर ने मुख्यमंत्री पद के लिए नामित डी के शिवकुमार और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया को भी बधाई दी।
उन्होंने कहा कि वह सरकार में उन्हें जो भी विभाग दिया जाएगा, उसकी जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे अभी नहीं पता कि कौन सा विभाग मिलेगा। जो भी विभाग दिया जाएगा, मैं उसमें काम करूंगा।’’
भाषा मनीषा सुरेश
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