नयी दिल्ली, 24 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष की उस याचिका पर 29 जुलाई को सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया, जिसमें आरोप लगाया गया है कि मध्य प्रदेश सरकार द्वारा नमाज पढ़ने के लिए चुनी गई वैकल्पिक जगह धार में विवादित भोजशाला परिसर से बहुत दूर है।
मुस्लिम पक्ष शुक्रवार की नमाज पढ़ने के लिए भोजशाला परिसर के नजदीक जगह उपलब्ध कराने का अनुरोध कर रहा है।
बाईस जुलाई को प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने शुक्रवार को याचिका को सूचीबद्ध करने का भरोसा दिया था। हालांकि, वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी ने सुनवाई के आखिर में इस मामले का जिक्र किया, क्योंकि यह वाद सूची में नहीं दिखाया गया था।
वरिष्ठ वकील ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के अधिकारी ‘‘नमाज अदा करने के लिए आस-पास कोई जगह आवंटित नहीं कर रहे हैं, और जुमे की नमाज दो बार पहले ही छूट चुकी है। दी गई जगह 1.3 किलोमीटर दूर है।’’
राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इन दलीलों का विरोध करते हुए कहा, ‘‘यह 900 मीटर दूर है।’’
अहमदी ने कहा, ‘‘हमारे पास हेलीकॉप्टर नहीं हैं… सड़क मार्ग से यह 1.3 किलोमीटर है। हमेशा इस अदालत के आदेशों का पालन न करने की कोशिश की जाती है।’’
सॉलिसिटर जनरल ने जवाब दिया, ‘‘मैं भावनाओं में नहीं बह सकता।’’
प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि अंतरिम याचिका पर सुनवाई 29 जुलाई के लिए सूचीबद्ध की जाए।
पीठ ने विवादित भोजशाला परिसर को देवी सरस्वती का मंदिर घोषित किए जाने के मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष की अपीलों पर विचार करते हुए 14 जुलाई को राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि जब तक मामले में अंतिम निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक अपराह्न एक बजे से तीन बजे तक जुमे की नमाज के लिए विवादित स्थल के पास कोई दूसरी खुली जगह मुहैया कराई जाए।
भाषा शफीक दिलीप
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