बेंगलुरु, 22 जून (भाषा) जनता दल (सेक्युलर) नेता एच डी कुमारस्वामी ने सोमवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार को बेंगलुरु दक्षिण जिले में बिदादी के पास प्रस्तावित ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप (जीबीआईटी) परियोजना और इसके लिए सरकार द्वारा किए जा रहे भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर खुली बहस की चुनौती दी।
कुमारस्वामी ने शिवकुमार से कहा कि उन्हें जब भी मौका मिले, बायरामंगला आएं, जहां किसान इस परियोजना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी ने दावा किया कि 80 से 90 प्रतिशत स्थानीय किसान इस टाउनशिप परियोजना के विरोध में हैं और सरकार द्वारा प्रारंभिक अधिसूचना जारी किए जाने के बाद से 4,000 से अधिक किसानों ने अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। प्रशासन द्वारा इन आपत्तियों का जवाब न दिए जाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने आलोचना की और पूछा, ‘क्या जनसेवा का यही मतलब होता है?’
कुमारस्वामी ने कहा, ‘(शिवकुमार की ओर से) बहस की चुनौती दी गई थी। आइए, बायरामंगला चलते हैं और देखते हैं कि क्या किसानों ने वास्तव में परियोजना के लिए अपनी जमीन देने की सहमति दी है।’
उन्होंने यहां संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘मैं पूरी तरह स्वतंत्र हूं। आप (शिवकुमार) सरकार चला रहे हैं और आधी रात 12 या 1 बजे तक व्यस्त रहेंगे। इसलिए मैंने कहा था कि आप जब भी समय निकालें और कार्यक्रम तय करें, मैं चर्चा के लिए आ जाऊंगा। मैं आज भी वही बात कह रहा हूं कि मैं स्वतंत्र हूं और कभी भी आ सकता हूं। मैंने कभी नहीं कहा कि मैं नहीं आऊंगा। वह व्यस्त हैं और मैं उनकी तरह व्यस्त नहीं हूं। इसलिए अपने व्यस्त कार्यक्रम के बीच यदि वह आते हैं, तो मैं किसी भी समय आने को तैयार हूं।’
उन्होंने कहा, ‘आइए बायरामंगला के लोगों के बीच चलते हैं, जहां महिलाएं और बुजुर्ग पिछले 450 से अधिक दिनों से धरने पर बैठे हैं। आइए उन्हीं के सामने इस पर चर्चा करें।’
हालांकि, शिवकुमार ने इस पर विस्तार से प्रतिक्रिया देने से इनकार करते हुए कहा कि जद (एस) विधायक आगामी विधानसभा सत्र के दौरान इस मुद्दे को उठाएं और वह वहीं इसका जवाब देंगे।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘मैं कुछ नहीं कहूंगा। जब मैंने (बहस के लिए) बुलाया था, तब वह (कुमारस्वामी) नहीं आए। विधानसभा सत्र होने वाला है, वहां वह अपने अनुभवी नेताओं (विधायकों) से इस मुद्दे पर बोलने को कहें। मैं उन्हें जवाब दूंगा… मैं उन्हें शुभकामनाएं देता हूं।’
किसानों और ग्रामीणों के एक वर्ग के विरोध के बावजूद हाल ही में रामनगर और हारोहल्ली तालुकों के तीन गांवों में 499 एकड़ भूमि के अधिग्रहण के लिए अंतिम अधिसूचना जारी की गई है। यह शिवकुमार की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक जीबीआईटी का हिस्सा है, जिसे भारत की ‘पहली एआई-संचालित एकीकृत टाउनशिप’ के रूप में प्रचारित किया जा रहा है।
भाषा सुमित दिलीप
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