कोलकाता, दो अप्रैल (भाषा) भाजपा ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने मालदा जिले में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के विरोध में सात न्यायिक अधिकारियों का कई घंटे तक घेराव करने के लिए भीड़ को उकसाया था।
मतदाता सूची से नामों को हटाने के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में शामिल तीन महिलाओं सहित सात न्यायिक अधिकारियों का बुधवार को कई घंटे तक घेराव किया था, जिसके बाद देर रात सुरक्षा बलों ने बल प्रयोग कर भीड़ को खदेड़ उन्हें बचाया। प्रदर्शनकारियों ने बुधवार को राष्ट्रीय राजमार्ग-12 (कोलकाता-सिलीगुड़ी) को भी अवरुद्ध कर दिया था।
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता देबजीत सरकार ने आरोप लगाया, ‘‘फर्जी मतदाताओं के नाम हटाए जाने के बाद चुनाव हारने के डर से, तृणमूल कांग्रेस ने जिले में जिहादी तत्वों को लामबंद किया और इस असंवैधानिक, अवैध प्रदर्शन को अंजाम दिया, जिसमें न्यायिक अधिकारियों, मजिस्ट्रेट और महिलाओं सहित कई लोगों को घंटों तक भीषण गर्मी में बंधक बनाकर रखा गया।’’
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में किसी भी विसंगति और पूरक सूची में नामों को शामिल करने को लेकर जारी अनिश्चितता का कारण ‘‘डेटा अपलोड करने में जानबूझकर की गई देरी’’ है, क्योंकि राज्य में पर्याप्त संख्या में अधिकारी नियुक्त नहीं थे।
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि प्रशासन का एक वर्ग अब भी ‘‘भ्रष्ट और अलोकतांत्रिक शासन’’ का साथ दे रहा है, लेकिन उन्हें अब अपनी पक्षपातपूर्ण गतिविधियों को बंद कर देना चाहिए।
तृणमूल कांग्रेस के प्रदेश महासचिव कुणाल घोष ने कहा, ‘‘निर्वाचन आयोग अब प्रशासन और पुलिस समेत सभी चीजों पर नजर रख रहा है। उन्हें यह बताना होगा कि ऐसी घटना क्यों हुई। नाराज ग्रामीणों ने न्यायिक अधिकारियों को इतने घंटों तक क्यों घेरा? हम कानून को अपने हाथ में लेने के किसी भी कदम का समर्थन नहीं करते।’’
घोष ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस ने एसआईआर के नाम पर मतदाता सूचियों से लाखों मतदाताओं के नाम हटाए जाने के मुद्दे को बार-बार उठाया था, जिसमें इस सूची में सबसे अव्वल स्थान वाला मालदा भी शामिल है।
उन्होंने कहा कि आयोग का ध्यान भी इस ओर दिलाया था, लेकिन उसने कभी संज्ञान नहीं लिया और कालीचक की घटना लोगों के गुस्से और हताशा का संकेत है।
घोष ने कहा, हालांकि तृणमूल कांग्रेस इस तरह के विरोध-प्रदर्शन का समर्थन नहीं करती है।
भाषा शफीक पवनेश
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