भाजपा ने बारुईपुर मुठभेड़ को ‘दैवीय न्याय’ बताया, तृणमूल गुटों ने अलग-अलग राय जाहिर की

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भाजपा ने बारुईपुर मुठभेड़ को ‘दैवीय न्याय’ बताया, तृणमूल गुटों ने अलग-अलग राय जाहिर की

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  • Publish Date - July 8, 2026 / 08:34 PM IST,
    Updated On - July 8, 2026 / 08:34 PM IST

कोलकाता, आठ जुलाई (भाषा) पश्चिम बंगाल के बारुईपुर में 11 साल की बच्ची के साथ कथित दुष्कर्म और हत्या से जुड़े मामले के मुख्य आरोपियों में एक की पुलिस मुठभेड़ में मौत के बाद बुधवार को राज्य की सियासत गरमा गई।

सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जहां इस घटनाक्रम को “दैवीय न्याय” करार दिया, वहीं तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी नीत खेमे ने इसे “जंगल राज” का उदाहरण बताया, जबकि प्रतिद्वंद्वी गुट ने पुलिस कार्रवाई का समर्थन किया।

दूसरी ओर, कांग्रेस और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की प्रदेश इकाइयों ने मुठभेड़ को “पूर्व नियोजित” बताते हुए इसकी गहन जांच की मांग की।

बारुईपुर दुष्कर्म-हत्याकांड का आरोपी प्रभास मंडल मंगलवार देर रात एक पुलिसकर्मी से कथित तौर पर पिस्तौल छीनकर हिरासत से भागने की कोशिश के दौरान पुलिस की जवाबी कार्रवाई में मारा गया।

पश्चिम बंगाल पुलिस का दावा है कि मंडल पूछताछ के दौरान जांचकर्ताओं को गुमराह कर रहा था और जांच में सहयोग नहीं कर रहा था, जिसके कारण जांच टीम घटना की कड़ियों को जोड़ने और अपराध में उसकी भूमिका का पता लगाने के लिए उसे मंगलवार रात 12 बजकर 45 मिनट पर दक्षिण 24 परगना जिले स्थित बारुईपुर के सूर्यपुर ले गई।

पुलिस ने कहा कि इसी दौरान मंडल ने अचानक एक पुलिसकर्मी से उसकी सरकारी पिस्तौल छीन ली और भागने का प्रयास किया।

पुलिस के मुताबिक, मंडल ने पुलिस टीम पर गोली भी चलाई। उसने कहा कि पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की, जिसमें मंडल घायल हो गया।

पुलिस के अनुसार, मंडल को बारुईपुर उप-मंडल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

घटना को लेकर बढ़ते जन आक्रोश के बीच हुई यह मुठभेड़ बंगाल में मई में भाजपा के सत्ता में आने के बाद इस तरह की पहली पुलिस कार्रवाई है।

भाजपा ने बारुईपुर मुठभेड़ को इस बात के सबूत के तौर पर पेश किया कि पार्टी की महिलाओं के खिलाफ अपराधों को “कतई बर्दाश्त न करने की नीति” है।

भाजपा प्रवक्ता देबजीत सरकार ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “बारुईपुर में एक लड़की के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या करने वाला राक्षस प्रभास मंडल मंगलवार देर रात उस समय पुलिस की गोलीबारी में मारा गया, जब उसने हथियार छीनकर भागने की कोशिश की। दैवीय न्याय!”

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा कि सरकार ने यह संदेश देने के लिए सख्त कदम उठाए हैं कि “किसी भी अपराधी या बलात्कारी को बख्शा नहीं जाएगा।”

उन्होंने कहा, “चुनाव से पहले भाजपा ने पश्चिम बंगाल की महिलाओं से ‘भय खत्म, भरोसा कायम’ का वादा किया था। हम अपने वादे को पूरा कर रहे हैं। किसी भी अपराधी को राजनीतिक संरक्षण नहीं दिया जाएगा।”

ममता के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती सरकार पर हमला तेज करते हुए भट्टाचार्य ने 2013 में कामदुनी में 20 वर्षीय एक कॉलेज छात्रा के सामूहिक दुष्कर्म और हत्या से जुड़े मामले को फिर से खोलने की अपनी मांग भी दोहराई।

उन्होंने कहा, “कामदुनी मामले की पीड़िता को न्याय नहीं मिला, क्योंकि जांच एक खास समुदाय को ध्यान में रखकर की गई थी। अब समय बदल गया है। कामदुनी मामले से जुड़ी फाइल फिर से खोली जानी चाहिए।”

कामदुनी मामले में न्याय की मांग को लेकर आंदोलन चलाने वाले प्रमुख चेहरों ने भी बारुईपुर मुठभेड़ का समर्थन किया।

कुछ महीने पहले भाजपा में शामिल होने वाली मौसमी कायल ने इसे “असुर वध” की शुरुआत बताया और कहा कि न्याय के लिए 13 साल लंबे संघर्ष में “आखिरकार कुछ सांत्वना” मिली है।

मौसमी ने कहा, “जांच तेजी से पूरी की जानी चाहिए, आरोपियों से जुर्म कबूल करवाना चाहिए और फिर उनका एनकाउंटर कर देना चाहिए। यही न्याय है। बलात्कारियों के लिए यही असली सजा है।”

कामुदनी जन-आंदोलन से जुड़ी टुंपा कायल ने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती तृणमूल शासन के दौरान सरकारी वकीलों को बार-बार बदले जाने से कामदुनी मामले में आरोपियों को मदद मिली।

वहीं, तृणमूल कांग्रेस के ममता खेमे की वरिष्ठ नेता और कृष्णानगर से सांसद महुआ मोइत्रा ने इस घटनाक्रम (बारुईपुर मुठभेड़) की तुलना “उत्तर प्रदेश मॉडल” से की।

उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट में मुठभेड़ से जुड़े हालात पर सवाल उठाते हुए कहा, “पश्चिम बंगाल पुलिस, यह क्या हो रहा है? बंगाल के लोग ‘बंगाल-उत्तर प्रदेश 2.0’ में आपका स्वागत है। भाजपा कोई सरकार नहीं है। यह जंगल राज है।”

वरिष्ठ तृणमूल सांसद सौगत रॉय ने आरोप लगाया कि यह घटना इस बात का सबूत है कि बंगाल पुलिस की कोई जवाबदेही नहीं रह गई है।

रॉय ने ‘पीटीआई वीडियो’ से बातचीत में कहा, “मैं बारुईपुर मामले के आरोपी प्रभास मंडल की मुठभेड़ में हुई मौत की निंदा करता हूं। इससे पता चलता है कि सरकार का पुलिस पर कोई नियंत्रण नहीं है। यह पुलिस की बर्बरता का सबसे बुरा स्वरूप है।”

उन्होंने कहा, “कल मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) दोनों बारुईपुर में थे। डीजीपी से 72 घंटे के भीतर अंतिम रिपोर्ट देने के लिए कहा गया था।”

रॉय ने कहा, “इसी अ‍वधि में मुठभेड़ में एक आरोपी की मौत हो गई। डीजीपी को उस जगह पर जाना चाहिए और मुठभेड़ में हुई मौत पर रिपोर्ट देनी चाहिए। बंगाल में ‘योगी मॉडल’ अपनाया जा रहा है।”

हालांकि, तृणमूल कांग्रेस के रीताब्रता बनर्जी नीत प्रतिद्वंद्वी गुट ने मुठभेड़ पर अलग राय जाहिर की। उसने पुलिस के पक्ष और सरकार की कार्रवाई का समर्थन किया।

केशपुर से विधायक शेउली साहा ने कहा कि अगर कोई आरोपी भागने की कोशिश करते हुए पुलिस पर हमला करता है, तो कानून मुठभेड़ की इजाजत देता है।

साहा ने कहा, “हमें सरकार के बयान पर भरोसा है। बलात्कारियों को सबसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए। राज्य सरकार ने आरजी कर मामले के बाद ऐसे अपराधों के लिए कड़ी सजा सुनिश्चित करने के वास्ते अपराजिता विधेयक भी पेश किया था।”

उन्होंने कहा कि मुठभेड़ की शक्तियों का इस्तेमाल “सरकार के नियंत्रण में ही होना चाहिए।”

हालांकि, कांग्रेस का तर्क था कि किसी जघन्य अपराध पर जनता के आक्रोश को कानूनी प्रक्रिया का विकल्प नहीं बनाया जा सकता।

पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने इस मुठभेड़ की जांच की मांग की। वहीं, बारुईपुर का दौरा करने वाले पार्टी नेता अधीर रंजन चौधरी ने मामले को संभालने के पुलिस के तरीके की आलोचना की और कहा कि ऐसी घटनाओं से मुख्यमंत्री की छवि खराब होगी।

कांग्रेस की छात्र नेता प्रियंका चौधरी ने मुठभेड़ की न्यायिक जांच की मांग की। उन्होंने कहा, “सबसे पहले मुकदमा चलाया जाना चाहिए। आरोपी के खिलाफ सबूत साबित होने चाहिए। सजा का फैसला सिर्फ न्यायपालिका को करना चाहिए। हमारी कानूनी-व्यवस्था में पहले से ही सबसे कड़ी सजा का प्रावधान है।”

माकपा नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता विकास रंजन भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि यह मुठभेड़ “पहले से तय” थी।

उन्होंने कहा, “यह किसी परीकथा जैसा लगता है। यह योगी (आदित्यनाथ) की शैली में किया गया एनकाउंटर था। मुख्य गवाह को खत्म कर दिया गया है।”

भाषा पारुल अविनाश

अविनाश