भाजपा बंगाल की मतदाता सूची से एक करोड़ नाम हटाने की साजिश रच रही है : ममता

भाजपा बंगाल की मतदाता सूची से एक करोड़ नाम हटाने की साजिश रच रही है : ममता

भाजपा बंगाल की मतदाता सूची से एक करोड़ नाम हटाने की साजिश रच रही है : ममता
Modified Date: March 6, 2026 / 09:45 pm IST
Published Date: March 6, 2026 9:45 pm IST

कोलकाता, छह मार्च (भाषा) पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को भाजपा पर आगामी विधानसभा चुनाव जीतने के प्रयास में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के माध्यम से राज्य की मतदाता सूची से 1 करोड़ से अधिक लोगों के नाम हटाने की साजिश रचने का आरोप लगाया।

बंगाली टेलीविजन चैनल न्यूज18 बांग्ला को दिए एक साक्षात्कार में, बनर्जी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर उनकी पार्टी के एजेंडे को पूरा करने के लिए दो वरिष्ठ अधिकारियों को धमकाने का भी आरोप लगाया।

उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर के तहत तार्किक विसंगति की आड़ में, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बड़ी संख्या में महिलाओं, अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति के लोगों, मुसलमानों और बिहारी जैसे भाषाई समुदायों के नामों को हटा दिया है, जो 2002 के बाद दशकों से राज्य में मतदान करते आ रहे हैं।

राज्य में इससे पहले 2002 में एसआईआर की कवायद की गयी थी।

मुख्यमंत्री ने कहा, “वे (भाजपा) इस बार मतदाता सूची से 1.3 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने की योजना बना रहे हैं, लेकिन हम लड़ेंगे और ऐसा नहीं होने देंगे। मुझे पता है कि यह एक राजनीतिक लड़ाई है।”

मतदाता सूची से वास्तविक मतदाताओं के नाम गायब करने में कथित भूमिका के लिए मुख्य निर्वाचन आयुक्त को “वैनिश कुमार” बताते हुए, उन्होंने कहा कि वह आने वाले दिनों में “फिनिश कुमार” बन जाएंगे। उन्होंने संकेत दिया कि उनका कार्यकाल जल्द ही समाप्त हो जाएगा।

बनर्जी ने कहा, “बंगाल में चुनाव आयोग के दो प्रतिनिधि भी लोगों को मतदान करने से रोकने की शाह की साजिश में शामिल हैं। मुझे जानकारी मिली है कि अमित शाह लगभग हर दिन अधिकारियों को फोन कर उन्हें धमकी दे रहे हैं।”

हालांकि, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने किसी भी अधिकारी का नाम लेकर उनकी पहचान नहीं बताई।

राज्य में 28 फरवरी को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल नवंबर में एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने के बाद से लगभग 63.66 लाख नाम, यानी मतदाताओं का लगभग 8.3 प्रतिशत, हटा दिए गए हैं, जिससे मतदाता आधार लगभग 7.66 करोड़ से घटकर 7.04 करोड़ से थोड़ा अधिक रह गया है।

इसके अतिरिक्त, 60.06 लाख से अधिक मतदाताओं को “विचाराधीन” श्रेणी में रखा गया है, जिसका अर्थ है कि आने वाले हफ्तों में कानूनी जांच के माध्यम से उनकी पात्रता निर्धारित की जाएगी।

उन्होंने दावा किया कि “मुसलमानों से लेकर प्रवासियों, महिलाओं, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, अन्य पिछड़ा वर्गों और मतुआओं तक,” लाखों नागरिकों के नाम हटा दिए गए थे, और पूछा, “यह किस ओर इशारा करता है?”

उन्होंने दावा किया कि दार्जिलिंग पहाड़ियों में 50,000 गोरखाओं के नाम हटा दिए गए।

टीएमसी प्रमुख ने शाह और कुमार को “महिला विरोधी” बताया।

उन्होंने कहा, “शादी के बाद महिलाएं अपना पैतृक पता बदल लेती हैं और कई बार ससुराल वालों का उपनाम भी अपना लेती हैं। क्या चुनाव आयोग को यह बात पता नहीं है? शाह और कुमार दोनों ने ही लाखों ऐसी महिलाओं के नाम तार्किक विसंगति की श्रेणी में शामिल करके अपना महिला-विरोधी रवैया दिखाया है।”

बनर्जी ने कहा कि पूरक सूचियां, जिनमें उन मतदाताओं के नाम शामिल हैं जो विचाराधीन हैं, अभी तक जारी नहीं हुई हैं।

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (एईआरओ) द्वारा अंतिम रूप दी गई सूची में दिल्ली में हेरफेर किया गया और कुछ नाम हटा दिए गए, और यह काम शाह ने किया।

बनर्जी ने कहा, “शाह की धमकियों के आगे कई लोगों ने सिर झुका लिया, लेकिन हर कोई एक जैसा नहीं होता। मेरे पास सारी जानकारी है और हम डरे हुए नहीं हैं। हम जानते हैं कि कैसे लड़ना है।”

उन्होंने दावा किया कि भाजपा ने “देश की जनता और विशेष रूप से बंगाल की जनता पर तीन गोलियां चलाई हैं – सीएए, एनआरसी और अब एसआईआर। वे लोगों को बांटना चाहते हैं और एक को दूसरे के खिलाफ खड़ा करना चाहते हैं।”

भाषा

प्रशांत माधव

माधव


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