‘फांसी घर’ मामले में स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान कर रही है भाजपा : केजरीवाल

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'फांसी घर' मामले में स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान कर रही है भाजपा : केजरीवाल

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  • Publish Date - March 6, 2026 / 08:10 PM IST,
    Updated On - March 6, 2026 / 08:10 PM IST

नयी दिल्ली, छह मार्च (भाषा) दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ‘फांसी घर’ विवाद को लेकर शुक्रवार को विधानसभा की विशेषाधिकार समिति के समक्ष पेश हुए और उन्होंने भाजपा सरकार पर विवादित ढांचे को ‘टिफिन रूम’ साबित करने की कोशिश करके ‘स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान’ करने का आरोप लगाया।

केजरीवाल ने विधानसभा परिसर में पत्रकारों से कहा, “2022 में, तत्कालीन विधानसभाध्यक्ष राम निवास गोयल ने पता लगाया कि इस इमारत के एक कोने में एक ‘फांसी घर’ था, जहां स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी दी जाती थी। उन्होंने मुझे बताया क्योंकि मैं मुख्यमंत्री था और कहा कि ‘हमें इसे पर्यटकों के लिए खोल देना चाहिए’।”

केजरीवाल ने कहा, ‘‘मैंने इसका उद्घाटन किया था, लेकिन भाजपा के सत्ता में आने के बाद वे यह साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि यह ‘फांसी घर’ नहीं बल्कि ‘टिफिन रूम’ था। मेरा मानना ​​है कि स्वतंत्रता सेनानियों का इससे बड़ा अपमान और कोई नहीं हो सकता।’’

केजरीवाल ने दावा किया, “भाजपा सिर्फ राजनीति करना चाहती है। क्या दिल्ली में यही एकमात्र मुद्दा बचा है? दिल्ली के लोग परेशान हैं, उन्हें आम आदमी पार्टी की सरकार याद आ रही है।”

‘फांसी घर’ विवाद दिल्ली विधानसभा के एक पुनर्निर्मित हिस्से को लेकर आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच का विवाद है। आम आदमी पार्टी का दावा है कि यह ब्रिटिश काल का फांसीघर था, जबकि भाजपा का कहना है कि यह एक टिफिन रूम था।

पिछले साल फरवरी में जब भाजपा दिल्ली में सत्ता में आई, तब विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने सदन को बताया कि ब्रिटिश काल की वह इमारत, जिसका जीर्णोद्धार तत्कालीन मुख्यमंत्री केजरीवाल ने 2022 में ‘फांसी घर’ के हिस्से के रूप में किया था और उद्घाटन किया था, वास्तव में एक टिफिन रूम था।

विधानसभा परिसर का 1912 का नक्शा दिखाते हुए गुप्ता ने कहा कि ऐसे कोई दस्तावेज या सबूत नहीं हैं जो यह दर्शाते हों कि उस जगह का इस्तेमाल फांसी देने के लिए किया जाता था और उन्होंने इस मामले को जांच के लिए विशेषाधिकार समिति को सौंप दिया।

दिल्ली में भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए केजरीवाल ने दावा किया कि लोगों को हजारों रुपये के बिजली बिल मिल रहे हैं, बिजली कटौती हो रही है और ‘हर जगह अराजकता फैली हुई है।’’

केजरीवाल ने कहा, ‘‘मैं (दिल्ली में सरकार चलाने का) अपना अनुभव खुशी-खुशी साझा करूंगा। मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन सी पार्टी सत्ता में है, मैं बस इतना चाहता हूं कि दिल्ली सुचारू रूप से चले।’’

जब समिति की कार्यवाही जारी थी तब आम आदमी पार्टी के कई कार्यकर्ताओं ने विधानसभा परिसर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि यह पूरी कवायद केजरीवाल को बदनाम करने के लिए की गई थी।

दिल्ली विधानसभा में विपक्ष की नेता आतिशी और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गोयल केजरीवाल के साथ विधानसभा के अंदर गए।

आम आदमी पार्टी (आप) के सूत्रों ने दावा किया, “दिल्ली पुलिस ने अरविंद केजरीवाल के निजी सुरक्षा अधिकारी को विधानसभा के बाहर ही रोक दिया। उनके निजी कर्मचारियों को भी रोका गया, जबकि उनके साथ चल रहे सुरक्षा वाहन को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई।”

आप नेता सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में कई विधानसभा समितियां गठित की गईं, और जब भी लोगों को इन समितियों के समक्ष पेश होने के लिए कहा गया, तो वे आमतौर पर एक या दो सहायकों के साथ आए।

भारद्वाज ने कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि भाजपा अब कार्यवाही का सीधा प्रसारण करने में हिचकिचा रही है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल चर्चा के लिए आए हैं और उन्हें मीडिया के सामने बोलने में कोई झिझक नहीं है।

आप नेता ने कहा कि उन्होंने कभी किसी विधानसभा समिति को किसी पूर्व विधानसभा अध्यक्ष या पूर्व मुख्यमंत्री को तलब करते हुए नहीं सुना है। भारद्वाज ने इस कदम को “बेतुका” बताया।

भारद्वाज ने कहा, ‘‘यह अजीब बात थी कि जिसे तलब किया गया था वह घबराया हुआ नहीं था और सभी सवालों के जवाब देने के लिए तैयार था। उसने केवल पारदर्शिता के लिए कार्यवाही का सीधा प्रसारण करने की मांग की, लेकिन तलब करने वाले असहज लग रहे थे।’’

उन्होंने कहा, “अगर भाजपा के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है, तो उसे सीधा प्रसारण की अनुमति देनी चाहिए या कम से कम पत्रकारों को कार्यवाही में उपस्थित रहने की इजाजत देनी चाहिए।”

इससे पहले दिन में, दिल्ली विधानसभा ने केजरीवाल को पत्र लिखकर शुक्रवार को समिति की कार्यवाही का सीधा प्रसारण करने के उनके अनुरोध को अस्वीकार कर दिया।

मंगलवार को, केजरीवाल ने विशेषाधिकार समिति को पत्र लिखकर पुष्टि की थी कि वह छह मार्च को उसके समक्ष उपस्थित होंगे और कार्यवाही का सीधा प्रसारण करने की मांग की थी।

भाषा अमित रंजन

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