बच्चों पर एआई के बढ़ते प्रभाव को लेकर भाजपा सदस्य ने राज्यसभा में जताई चिंता

बच्चों पर एआई के बढ़ते प्रभाव को लेकर भाजपा सदस्य ने राज्यसभा में जताई चिंता

बच्चों पर एआई के बढ़ते प्रभाव को लेकर भाजपा सदस्य ने राज्यसभा में जताई चिंता
Modified Date: August 10, 2026 / 12:42 pm IST
Published Date: August 10, 2026 12:42 pm IST

नयी दिल्ली, दस अगस्त (भाषा) बच्चों पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंता जताते हुए राज्यसभा में सोमवार को भाजपा के एक सदस्य ने इसके उपयोग को लेकर स्पष्ट राष्ट्रीय दिशा-निर्देश बनाए जाने की मांग की।

उच्च सदन में यह मुद्दा उठाते हुए भाजपा के डॉ के लक्ष्मण ने कहा कि एआई तेजी से जीवन का हिस्सा बन रहा है, लेकिन बच्चों की सुरक्षा और उनके संतुलित विकास को ध्यान में रखते हुए इसके इस्तेमाल के लिए सावधानी बरतना जरूरी है।

डॉ. लक्ष्मण ने कहा कि देश ने डिजिटल क्षेत्र में कई उदाहरण पेश किए हैं, जिनमें यूपीआई जैसी पहल शामिल हैं, लेकिन नई तकनीकों के इस्तेमाल के साथ उनसे जुड़ी चुनौतियों पर भी ध्यान देना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को एआई के इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, क्योंकि कम उम्र में इसका अत्यधिक उपयोग उनके मानसिक विकास, सीखने की क्षमता और व्यवहार पर असर डाल सकता है। उन्होंने कहा कि बच्चों को प्रौद्योगिकी के सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल के बारे में जागरूक करना भी जरूरी है।

भाजपा नेता ने कहा कि कई देशों ने बच्चों पर सोशल मीडिया के प्रभाव को देखते हुए इसके इस्तेमाल पर प्रतिबंध या कड़े नियम लागू किए हैं और भारत को भी इस दिशा में गंभीरता से विचार करना चाहिए तथा बच्चों के हितों की रक्षा के लिए उचित कदम उठाने चाहिए।

उन्होंने एआई की पहुंच को लेकर डिजिटल असमानता पर भी चिंता जताई।

डॉ. लक्ष्मण ने कहा कि एआई का लाभ केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। ‘‘यदि ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों तक नई प्रौद्योगिकी की पहुंच नहीं बढ़ाई गई तो समाज में डिजिटल अंतर और बढ़ सकता है।’’

उन्होंने कहा कि एआई के क्षेत्र में देश को आगे बढ़ाने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि इसका लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे। इसके लिए केंद्र सरकार को एक व्यापक राष्ट्रीय नीति और दिशा-निर्देश तैयार करने चाहिए, जिससे एआई का सुरक्षित, समान और जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित हो सके।

भाषा मनीषा माधव

माधव


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