मणिपुर हिंसा: सीबीआई, एनआईए की जांच वाले मामलों के लिए दो विशेष अदालतें गठित करने का निर्देश
मणिपुर हिंसा: सीबीआई, एनआईए की जांच वाले मामलों के लिए दो विशेष अदालतें गठित करने का निर्देश
नयी दिल्ली, 10 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को मणिपुर और असम सरकार तथा अन्य से कहा कि वे मणिपुर में 2023 की जातीय हिंसा से जुड़े सीबीआई और एनआईए मामलों की सुनवाई के लिए दो विशेष अदालतें गठित करने पर विचार करें।
मणिपुर में जातीय हिंसा से जुड़े मामलों की जांच की स्थिति का जायजा लेते हुए, प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने अधिकारियों को उन मामलों का विवरण तैयार करने का निर्देश दिया, जिनमें आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है, ताकि पीड़ित, उनके परिवार और कानूनी सलाहकार संबंधित रिकॉर्ड देख सकें।
पीठ ने संबंधित उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को सुनवाई की अगली तारीख से पहले इस मामले पर एक वस्तु स्थिति रिपोर्ट जमा करने का भी निर्देश दिया।
शीर्ष अदालत ने आदेश दिया, ‘‘अधिकारियों को दो अलग-अलग विशेष अदालतें गठित करने पर विचार करना चाहिए – एक सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) मामलों के लिए और दूसरी मणिपुर हिंसा से जुड़े एनआईए (राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण) मामलों के लिए। उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल सुनवाई की अगली तारीख से पहले इस संबंध में वस्तु स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करें।’’
प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि पीठ ने जांच की निगरानी के लिए एक तौर-तरीका तय किया है और ऐसी जांच से जुड़ी रिपोर्ट के बारे में निर्देश भी जारी किए हैं।
पीठ ने कहा कि ऐसे मामले भी हैं जिनमें आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है।
शीर्ष अदालत ने कहा कि उन मामलों के विवरण को उपलब्ध कराया जाए ताकि वकीलों और संबंधित परिवारों को रिपोर्ट और कार्यवाही की जानकारी मिल सके। पीठ ने कहा, ‘‘हम इस अनुरोध को स्वीकार करते हैं और निर्देश देते हैं कि संबंधित विवरण और रिपोर्ट एकत्र कर अदालत के समक्ष पेश किया जाए।’’
शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘हमने सीबीआई और एनआईए की जांच वाले मामलों की वस्तु स्थिति रिपोर्ट और उन अदालतों पर भी गौर किया है, जहां आरोपपत्र दाखिल किए गए हैं। यह उल्लेख किया गया है कि सीबीआई और एनआईए के मामलों पर सुनवाई के लिए विशेष न्यायाधीश हैं।’’
पीठ ने कहा कि उसकी चिंता यह है कि क्या ये अदालतें सिर्फ मणिपुर हिंसा से जुड़े सीबीआई और एनआईए के मामलों की ही सुनवाई कर रही हैं या वे दूसरे मामलों को भी देख रही हैं।
इसके बाद इसने अधिकारियों से दो अलग-अलग विशेष अदालतें गठित करने पर विचार करने को कहा — एक सीबीआई के मामलों के लिए और दूसरी मणिपुर हिंसा से जुड़े एनआईए के मामलों के लिए।
पीठ ने असम राइफल्स के कर्मियों पर हुए हमलों और जनगणना से पहले राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) की मांग को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शनों से जुड़ी बातों पर भी गौर किया।
इसने कहा, ‘‘मणिपुर में सुरक्षा की स्थिति के बारे में, मणिपुर पुलिस और सुरक्षाबलों की संयुक्त कार्रवाई में हथियार और गोला-बारूद की बरामदगी और गिरफ्तारियां करने की प्रक्रिया मजबूत हुई है। कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए, सीबीआई और एनआईए को जरूरी मदद दी जाएगी ताकि वे बिना किसी रुकावट के अपनी जांच कर सकें।’’
शीर्ष अदालत ने कहा कि मणिपुर राज्य के साथ-साथ केंद्रीय एजेंसियां और सुरक्षा एजेंसियां प्रणाली के सही कामकाज और सुरक्षा बनाए रखने के लिए जरूरी सहयोग और तालमेल करेंगी, जिसमें छात्रों की सुरक्षा भी शामिल है।
सुनवाई के दौरान, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने पीठ को बताया कि सीबीआई ने 31 मामलों की जांच की है और 27 मामलों में अंतिम रिपोर्ट दाखिल की है, जिनमें 22 आरोपपत्र और पांच ‘क्लोजर रिपोर्ट’ (मामला बंद करने का अनुरोध) शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि चार मामलों की जांच अभी जारी है। सीबीआई के जिन 22 मामलों में आरोपपत्र दाखिल किया गया है, उनमें से 20 मामलों का संज्ञान लिया गया है, जबकि दो मामले अभी लंबित हैं।
मणिपुर में जातीय हिंसा में 3 मई 2023 से अब तक 200 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, सैकड़ों अन्य घायल हुए हैं और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं।
भाषा सुभाष नेत्रपाल
नेत्रपाल

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