स्थानीय निकाय चुनाव से पहले मतभेद कम करें पार्टी नेता: भाजपा की त्रिपुरा इकाई के अध्यक्ष

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स्थानीय निकाय चुनाव से पहले मतभेद कम करें पार्टी नेता: भाजपा की त्रिपुरा इकाई के अध्यक्ष

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  • Publish Date - July 24, 2026 / 11:22 AM IST,
    Updated On - July 24, 2026 / 11:22 AM IST

अगरतला, 24 जुलाई (भाषा) त्रिपुरा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष अभिषेक देबरॉय ने पार्टी नेताओं से आपसी मतभेद कम करने और संगठन को मजबूत करने के लिए एकजुट होकर काम करने का आग्रह करते हुए कहा कि आंतरिक गुटबाजी से पार्टी कमजोर होगी।

उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब भाजपा त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (टीटीएएडीसी) के तहत ग्राम समितियों और अगरतला नगर निगम (एएमसी) समेत शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव की तैयारी कर रही है।

देबरॉय ने बृहस्पतिवार को सिपाहीजाला जिले के बिशालगढ़ टाउन हॉल में पार्टी के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हाल में हुए संगठनात्मक फेरबदल का उल्लेख किया। इस फेरबदल में विधायक सुशांत देब की जगह अरिंदम देब को भारतीय जनता युवा मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘कुछ लोग कह सकते हैं कि सुशांत देब को किनारे कर दिया गया है क्योंकि अब वह युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष नहीं हैं। मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ था, जब मुझे गोमती जिला अध्यक्ष पद से हटाया गया था। उस समय भी कुछ लोगों ने कहा था कि मुझे किनारे कर दिया गया है लेकिन आज मैं प्रदेश अध्यक्ष हूं। यदि मुझे उस पद से नहीं हटाया गया होता तो शायद मैं प्रदेश अध्यक्ष नहीं बन पाता।’’

भाजपा को समावेशी संगठन बताते हुए देबरॉय ने कहा कि पार्टी को मजबूत करने के लिए नेताओं को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी जाती हैं और संगठनात्मक पद में बदलाव को झटके के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

उन्होंने गुटबाजी के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा कि वह पार्टी के भीतर किसी विशेष गुट के लिए काम नहीं करेंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे अगले तीन वर्ष तक प्रदेश इकाई का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यदि हम संगठन को मजबूत करना चाहते हैं तो नेताओं और कार्यकर्ताओं को अपने मतभेद भुलाने होंगे।’’

देबरॉय ने कहा, ‘‘समस्याएं हर जगह होती हैं, लेकिन हमें उन्हें कम करना होगा। कुछ स्थानों पर मौजूदा मंडल अध्यक्ष का अपने पूर्ववर्ती से टकराव चल रहा है, जो उचित नहीं है। यदि आंतरिक विवादों के कारण संगठन में किसी को नुकसान होता है तो कुछ नहीं किया जा सकता।’’

भाषा सिम्मी गोला

गोला