भाजपा के तेजस्वी सूर्या ने कर्नाटक के राज्यपाल से उद्यान संशोधन विधेयक लौटाने का आग्रह किया

भाजपा के तेजस्वी सूर्या ने कर्नाटक के राज्यपाल से उद्यान संशोधन विधेयक लौटाने का आग्रह किया

भाजपा के तेजस्वी सूर्या ने कर्नाटक के राज्यपाल से उद्यान संशोधन विधेयक लौटाने का आग्रह किया
Modified Date: August 26, 2026 / 05:21 pm IST
Published Date: August 26, 2026 5:21 pm IST

बेंगलुरु, 26 अगस्त (भाषा) बेंगलुरु दक्षिण से भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने बुधवार को कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत से उस विधेयक को पुनर्विचार के लिए राज्य विधानमंडल को लौटाने का आग्रह किया, जिसमें उद्यान की जमीन के कुछ हिस्सों का इस्तेमाल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और उपयोगिता परियोजनाओं के लिए करने की अनुमति दी गई है।

उन्होंने आरोप लगाया कि इस कानून से राज्य के हरित क्षेत्रों में जो बदलाव होगा, उसे बाद में वापस पहले की स्थिति में लाना संभव नहीं होगा।

सूर्या के नेतृत्व में नागरिकों, वॉकर्स एसोसिएशन और पूर्व वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात की और उन्हें ज्ञापन सौंपा।

कर्नाटक सरकार उद्यान (संरक्षण) (संशोधन) विधेयक, 2026 को सोमवार को विधानसभा ने पारित किया। इस विधेयक का उद्देश्य 1975 के अधिनियम में संशोधन करना है।

विपक्ष के विरोध के बीच राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों ने बिना चर्चा के विधेयक को मंजूरी दे दी। विपक्ष मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफे की मांग कर रहा था।

राज्यपाल को लिखे पत्र में सूर्या ने कहा कि नागरिकों, नागरिक समाज संगठनों, विशेषज्ञों और पूर्व वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों की ओर से जताई गई चिंताओं के बावजूद विधेयक को 24 अगस्त को “बिना किसी सार्थक बहस” के दोनों सदनों में पारित कर दिया गया।

संशोधन के तहत राज्य सरकार को सरकारी उद्यानों की जमीन का कुल क्षेत्रफल या उनमें मौजूद इमारतों के क्षेत्रफल के अधिकतम पांच प्रतिशत तक हिस्सा बिक्री, पट्टे, उपहार, अदला-बदली, रेहन (गिरवी) या अन्य किसी माध्यम से हस्तांतरित करने की अनुमति होगी।

उन्होंने कहा कि यह प्रावधान सार्वजनिक उपयोगिता परियोजनाओं के लिए सरकारी विभागों, वैधानिक प्राधिकरणों, सरकारी कंपनियों और स्थानीय निकायों पर लागू होगा। ऐसे माध्यमों से पहले ही हस्तांतरित की जा चुकी जमीन को भी पांच प्रतिशत की अधिकतम सीमा में शामिल किया जाएगा।

सूर्या ने तर्क दिया कि उद्यानों की जमीन के इस्तेमाल को दूसरी परियोजनाओं के लिए देना “मनमाना” फैसला है। उन्होंने स्वस्थ पर्यावरण के अधिकार को लेकर भी चिंता जताई, जिसे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा माना गया है।

भाषा तान्या मनीषा

मनीषा


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