कोलकाता, दो जुलाई (भाषा) कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी नीत धड़े की याचिका पर सुनवाई करते हुए निजी बैंक के अधिकारियों को पार्टी के खातों में जमा राशि की जानकारी देने का निर्देश दिया।
ममता नीत गुट ने पार्टी के बैंक खातों से लेन-देन पर लगी रोक को चुनौती दी है।
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने बिधाननगर पुलिस को अगली सुनवाई के दौरान संबंधित शिकायत और उसके आधार पर दर्ज की गई प्राथमिकी की जांच से जुड़े रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश दिया।
अदालत ने संबंधित निजी बैंक के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सात जुलाई तक तृणमूल के तीन खातों में जमा राशि की जानकारी अदालत के समक्ष रखें।
न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने इसी के साथ मामले की अगली सुनवाई आठ जुलाई के लिए सूचीबद्ध कर दी।
बिधाननगर पुलिस का पक्ष रखने के लिए पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से अनुरोध किया कि वह इस मामले में कुछ दिनों के लिए कोई भी अंतरिम आदेश पारित न करें।
मेहता ने अदालत को बताया कि पुलिस ने मामले की जांच की है और वह पीठ के समक्ष ऐसे रिकॉर्ड पेश करेंगे जिनसे यह साबित हो सके कि पैसे का गबन किया जा रहा था।
उन्होंने कहा कि सवाल यह है कि तृणमूल के दोनों गुटों में से कौन इन बैंक खातों का संचालन कर सकता है।
न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने कहा कि अदालत इस मुद्दे पर विचार कर रही है कि क्या याचिका पर सुनवाई के दौरान इन तीनों खातों को संयुक्त विशेष अधिकारियों (जो अदालत के सेवानिवृत्त न्यायाधीश होंगे) के माध्यम से संचालित करने की अनुमति दी जा सकती है।
अदालत ने इस तथ्य का संज्ञान लिया कि प्राथमिकी 18 जून को शाम छह बजे दर्ज की गई और बैंक ने अगले ही दिन ममता बनर्जी नीत गुट को लिखित जानकारी दी कि उनके खातों से राशि निकाले पर रोक लगा दी गई है।
न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने सवाल किया कि यह किस जल्दबाजी में किया गया और जांच एजेंसी के पास शुरुआती तौर पर क्या सबूत थे।
सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि वह अदालत के सामने ऐसे दस्तावेज़ या जानकारी रखेंगे जो अदालत की अंतरात्मा को झकझोर सकते हैं।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने सवाल किया कि क्या किसी सक्रिय राजनीतिक दल के खाते पर रोक लगाकर और समान अवसर की स्थिति को छीनकर उसे पंगु बनाया जा सकता है।
उन्होंने दलील दी कि बैंक खातों से धन निकासी पर रोक से मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का सवाल उठता है।
सिंघवी ने दावा किया कि शिकायत अस्पष्ट है और इसमें ऐसी कोई तथ्यात्मक जानकारी नहीं है जिसके आधार पर पुलिस कोई कार्रवाई कर सके।
उन्होंने दावा किया कि ऐसी शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई और अगले ही दिन बैंक खाते ‘फ्रीज़’ कर दिए गए।
सिंघवी ने अदालत के सामने कहा कि यह सच है कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस को विधानसभा चुनाव में हार मिली है और उसके सदस्यों की संख्या में भी कमी आई है।
उन्होंने दलील दी कि इस तरह सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल करके हारने वाली पार्टी को पंगु नहीं बनाया जा सकता।
सिंघवी ने अदालत से एक अंतरिम आदेश पारित करने का अनुरोध किया ताकि उक्त खातों से राशि निकालने की अनुमति मिल सके।
शिकायतकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज किशन कौल ने याचिका की पोषणीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को बैंक खाते को संचालित करने की मांग करने का कोई अधिकार नहीं है, क्योंकि पार्टी की एक नयी राष्ट्रीय समिति नियुक्त की जा चुकी है।
उन्होंने दलील दी कि शिकायत इसलिए दर्ज कराई गई क्योंकि अगर कोई गुट पार्टी की छवि खराब करने के लिए गैर-कानूनी लेन-देन करने और खातों में पैसे भेजने की कोशिश कर रहा है, तो यह एक अपराध है और पुलिस इस मामले में शिकायत की जांच कर रही है।
कौल ने विरोधी गुट का संदर्भ देते हुए सवाल किया कि याचिकाकर्ता किस अधिकार से तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करने का दावा कर रहा है।
तृणमूल कांग्रेस के बागी विधायकों द्वारा पार्टी के तीन खातों में जमा राशि के स्रोत की जांच करने की मांग को लेकर दर्ज कराई गई शिकायत के बाद इन खातों से धन निकासी पर रोक लगा दी गई।
ऋतब्रत बनर्जी नीत गुट से जुड़े कुछ विधायकों ने बिधाननगर पुलिस आयुक्तालय के साइबर अपराध थाने में शिकायत कर इन खातों की विस्तृत जांच की मांग की है।
भाषा धीरज नरेश
नरेश