‘बेंच व बार’ के बीच मुद्दों को सुलझाने के लिए शिकायत निवारण समितियों के गठन का आह्वान

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‘बेंच व बार’ के बीच मुद्दों को सुलझाने के लिए शिकायत निवारण समितियों के गठन का आह्वान

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  • Publish Date - May 11, 2026 / 09:49 PM IST,
    Updated On - May 11, 2026 / 09:49 PM IST

नयी दिल्ली, 11 मई (भाषा) शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालयों तथा जिला एवं तालुका अदालतों में अखिल भारतीय स्तर पर शिकायत निवारण समितियों के गठन का सोमवार को आह्वान किया, ताकि ‘बेंच और बार’ के बीच उत्पन्न मुद्दों का सौहार्दपूर्ण समाधान किया जा सके।

शीर्ष अदालत ने यह आदेश हाल में वायरल हुई एक वीडियो से संबंधित दो याचिकाओं की सुनवाई करते हुए पारित किया, जिसमें आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश एक युवा वकील को कथित तौर पर चेतावनी देते हुए दिखाई दे रहे हैं कि प्रक्रियात्मक चूक के कारण उन्हें 24 घंटे की न्यायिक हिरासत में भेज दिया जायेगा।

प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इस बात पर गौर किया कि वीडियो के संबंध में भारतीय विधिज्ञ परिषद (बीसीआई) और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) से औपचारिक सूचना प्राप्त होने से पहले ही, सीजेआई ने उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से इस मुद्दे पर रिपोर्ट भेजने को कहा था।

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से प्राप्त रिपोर्ट ने इस मामले में उत्पन्न चिंताओं को काफी हद तक दूर कर दिया है और सोशल मीडिया पर क्लिप के प्रसारित होने से पहले ही पक्षों के बीच इस मुद्दे का समाधान हो गया था।

पीठ ने कहा, ‘‘हमारा मानना ​​है कि इस घटना के संबंध में हमारी ओर से किसी और कार्रवाई की आवश्यकता नहीं है।’’

इसने यह भी कहा कि उच्च न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा की गई महत्वपूर्ण टिप्पणियों को न्यायिक आदेश में शामिल नहीं किया गया था।

पीठ ने हालांकि कहा कि न्यायपालिका के सभी स्तरों के सदस्यों को धैर्य, करुणा और प्रोत्साहन की भावना प्रदर्शित करनी चाहिए, विशेष रूप से बार के युवा सदस्यों के प्रति।

पीठ ने कहा कि युवा विधि स्नातकों को बार में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, विशेष रूप से निचली अदालतों में।

पीठ ने कहा, ‘‘न्यायपालिका को इस तथ्य का ध्यान रखना चाहिए कि न्यायाधीशों की संख्या सभी स्तरों पर वकीलों के निरंतर विकास पर निर्भर करती है।’’

इसने इस बात पर प्रकाश डाला कि मीडिया की एक महत्वपूर्ण भूमिका है और किसी भी संदर्भ से अलग किए गए वीडियो के प्रसार से अनावश्यक पूर्वाग्रह पैदा होने की आशंका है।

पीठ ने कहा, ‘‘हम उम्मीद करते हैं कि मीडिया भी जिम्मेदारी की भावना के साथ सक्रिय भूमिका निभाएगा।’’

इसने कहा, ‘‘हम सभी उच्च न्यायालयों से शिकायत निवारण समितियों का गठन करने का आह्वान करना उचित समझते हैं…।’’

पीठ ने कहा कि जिला और तालुका स्तर पर भी ऐसी समितियों का गठन किया जाये।

इसने कहा कि इस तरह की संस्थागत व्यवस्था यह सुनिश्चित करेगी कि न्यायपालिका और बार एसोसिएशन के बीच उत्पन्न होने वाले किसी भी मुद्दे का सौहार्दपूर्ण ढंग से समाधान हो जाए।

उच्चतम न्यायालय ने पाया कि मामले से संबद्ध वकील की फाइल फिसलकर जमीन पर गिर गई थी, हालांकि पीठ का अनादर करने का कोई जानबूझकर इरादा नहीं था, फिर भी न्यायाधीश ने इसे अनुचित कृत्य माना।

वीडियो सामने आने के बाद, बीसीआई और एससीबीए ने प्रधान न्यायाधीश से घटना का संज्ञान लेने का आग्रह किया था।

भाषा

देवेंद्र सुरेश

सुरेश