क्या तृणमूल के ‘फ्रीज’ किये गए बैंक खातों से रोजाना के खर्च के लिए कुछ राशि दी जा सकती है : न्यायालय

Ads

क्या तृणमूल के ‘फ्रीज’ किये गए बैंक खातों से रोजाना के खर्च के लिए कुछ राशि दी जा सकती है : न्यायालय

  •  
  • Publish Date - August 3, 2026 / 06:18 PM IST,
    Updated On - August 3, 2026 / 06:18 PM IST

नयी दिल्ली, तीन अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से सवाल किया कि क्या तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी गुट के ‘फ्रीज’ किये गए बैंक खातों से कुछ रकम निकालकर अदालत द्वारा नियुक्त विशेष अधिकारी को दी जा सकती है, ताकि पार्टी के रोजमर्रा के खर्च पूरे किए जा सकें।

ईडी की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ को बताया कि वह इस मामले में निर्देश लेंगे।

ईडी ने धन शोधन की जांच के सिलसिले में तीन बैंक खातों से पैसों के लेन-देन पर रोक लगा रखी है, जिनमें कुल 440.42 करोड़ रुपये जमा हैं। यह जांच पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर की जा रही है, जिसमें पैसों के संदिग्ध लेन-देन, गैर-कानूनी तरीके से पैसे जुटाने और पार्टी के कुछ खातों के ज़रिए संदिग्ध रकम की हेरा-फेरी करने के आरोप हैं।

शीर्ष अदालत, तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी गुट की उस याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें कलकत्ता उच्च न्यायालय के 20 जुलाई के एक आदेश को चुनौती दी गई थी।

उच्च न्यायालय ने ममता बनर्जी गुट पर ईडी द्वारा पार्टी के तीन बैंक खातों से लेन-देन पर लगाई गई रोक के संबंध में अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था।

सोमवार को उच्चतम न्यायालय में सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि खातों से लेन-देन के रोक की वजह से पार्टी अपने कर्मचारियों का वेतन भी नहीं दे पा रही है।

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि ईडी की ओर से रकम की निकासी पर रोक लगाये गए तीन खातों के अलावा, पार्टी के नाम पर 36 और खाते हैं और उनमें 164 करोड़ रुपये जमा हैं।

उच्च न्यायालय के आदेश का जिक्र करते हुए सिब्बल ने कहा, ‘‘उक्त आदेश में क्या कहा गया है – इसमें कहा गया है कि 36 अलग-अलग खाते हैं, जिनसे लेन-देन पर रोक नहीं लगाई गई है। यह बात तथ्यात्मक रूप से गलत है।’’

राजू ने इन दलीलों का विरोध किया और कहा कि जांच चल रही है और उन खातों से धन शोधन हुआ है।

उन्होंने कहा कि धन शोधन रोधी कानून ‘‘केवल वास्तविक धन शोधन से ही जुड़ा हुआ नहीं है, बल्कि धन शोधन रोकने के लिए भी है। हम इसकी रोकथाम कर रहे हैं।’’

राजू ने जब कहा कि यह ‘‘लगातार होने वाला अपराध’’ है, तो सिब्बल ने इन दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि जब बैंक खातों से लेन-देन पर रोक लगा दी गई, तो वह (राजू) ऐसी दलील कैसे दे सकते हैं।

पीठ को बताया गया कि उच्च न्यायालय ने पार्टी के दैनिक खर्चों के लिए तीन बैंक खातों के संचालन में सुविधा प्रदान करने के वास्ते कलकत्ता उच्च न्यायालय के एक पूर्व न्यायाधीश को विशेष अधिकारी नियुक्त किया है।

शीर्ष अदालत ने सवाल किया कि क्या पार्टी के दैनिक खर्चों को पूरा करने के लिए विशेष अधिकारी को कुछ राशि जारी की जा सकती है।

राजू के यह कहने के बाद कि वह इस मामले में निर्देश लेंगे, पीठ ने मामले की सुनवाई 11 अगस्त के लिए निर्धारित कर दी।

भाषा सुभाष दिलीप

दिलीप