आखिरी सांस तक कंट्रोल थामे थे कैप्टन सुमित सभरवाल : एआई-171 हादसे के चश्मदीद का दावा
आखिरी सांस तक कंट्रोल थामे थे कैप्टन सुमित सभरवाल : एआई-171 हादसे के चश्मदीद का दावा
अहमदाबाद, 20 मई (भाषा) एआई-171 विमान हादसे में अपने परिवार के तीन सदस्यों को खो चुके गुजरात के एक व्यक्ति ने दावा किया कि उसने अहमदाबाद के शवगृह में विमान के कप्तान सुमित सभरवाल का शव देखा था और वह बैठी अवस्था में विमान का स्टीयरिंग पकड़े हुई हालत में था।
वोहरा के ये दावे उस समय सामने आए हैं, जब विमान दुर्घटना के कारणों और उड़ान के अंतिम क्षणों में कॉकपिट में हुई गतिविधियों को लेकर चर्चा जारी है।
उनके दावों को आधार बनाते हुए अमेरिका की एक विधि कंपनी के अधिकारी ने कहा कि इस त्रासदी के लिए किसी ‘एक व्यक्ति’ को जिम्मेदार ठहराने से पहले दुर्घटना की जांच ‘‘वास्तव में स्वतंत्र विशेषज्ञों’’ से कराई जानी चाहिए। वह अपने आप को हादसे के 100 से अधिक पीड़ित परिवारों का प्रतिनिधि बताते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘परिवारों को सच्चाई जानने का अधिकार है, न कि जल्दबाजी में निकाला गया ऐसा निष्कर्ष जो शक्तिशाली कंपनियों या संस्थानों को बचाने वाला हो।’’
लंदन जा रही एअर इंडिया की उड़ान एआई-171 सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरने के कुछ ही क्षण बाद 12 जून को अहमदाबाद के मेघाणीनगर इलाके में एक हॉस्टल परिसर की इमारत से टकरा गई थी। इस हादसे में विमान में सवार 241 लोगों और परिसर के आसपास मौजूद 19 लोगों की मौत हो गई थी। केवल एक यात्री जीवित बचा था।
विमान का संचालन पायलट कैप्टन सुमित सभरवाल और सह-पायलट कैप्टन क्लाइव कुंदर कर रहे थे।
इस हादसे में अपने भाई, भतीजी और एक रिश्तेदार को खोने वाले रोमन वोहरा ने दावा किया कि वह 13 जून को अपने परिजनों के शवों की तलाश में शवगृह के अंदर गए थे और वहीं उन्होंने कैप्टन सभरवाल का शव देखा था।
पेशे से लैब तकनीशियन वोहरा ने मंगलवार को ‘पीटीआई-भाषा’ से फोन पर बातचीत में कहा कि उन्हें अंदर जाने की अनुमति इसलिए मिली क्योंकि वह चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘मेरे भाई, भाई की बेटी और मेरी रिश्तेदार की इस हादसे में मौत हो गई थी। हादसे के एक दिन बाद मैं उनकी पहचान करने गया था। चूंकि मैं मेडिकल क्षेत्र से हूं और कुछ लोगों से संपर्क भी है इसलिए मुझे शवगृह के अंदर जाने की अनुमति मिल गई।’’
वोहरा ने कहा कि कैप्टन सभरवाल का शव अन्य शवों से अलग एक मेज के किनारे रखा गया था।
उन्होंने दावा किया, ‘‘उस समय शव अकड़ा हुआ था और बैठी हुई मुद्रा में था, मानो वह अब भी अपनी सीट पर बैठे हों।’’
वोहरा ने बताया, ‘‘उनके हाथ स्टीयरिंग (नियंत्रण यंत्र) पकड़े हुए थे। उनके पैर उसी तरह मुड़े हुए थे जैसे बैठे हुए व्यक्ति के होते हैं।’’
जब उनसे पूछा गया कि क्या नियंत्रण यंत्र तब भी पायलट के हाथ में था, तो उन्होंने जवाब दिया, ‘‘हां, स्टीयरिंग उनके हाथों में था।’’
वोहरा ने यह भी दावा किया कि कप्तान अपनी वर्दी में थे, जिससे उन्हें शव की पहचान हुई।
उन्होंने कहा, ‘‘कप्तान ने वर्दी पहनी हुई थी। वहां केवल एक कप्तान का शव था, जो सुमित सभरवाल सर का था। मैंने वर्दी से उन्हें पहचान लिया।’’
वोहरा के अनुसार शव के सामने वाले हिस्से पर अपेक्षाकृत कम जलने के निशान थे।
उन्होंने कहा, ‘‘वह पीछे की तरफ ज्यादा जले हुए थे। सामने का हिस्सा और चेहरा उतना नहीं जला था। मुझे हर बात ठीक-ठीक याद नहीं है, लेकिन साफ पता चल रहा था कि वह कप्तान का शव था।’’
वोहरा ने कहा कि बाद में पायलट की सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तस्वीरें देखने के बाद पहचान की पुष्टि हुई।
उन्होंने हादसे के बाद अस्पताल के बाहर इंतजार कर रहे परिजनों के मानसिक आघात का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा, ‘‘उस समय हमारा अपना दुख इतना बड़ा था कि हम किसी से बात करने की हालत में नहीं थे। शव मिलने का इंतजार करते हुए मैं 10 दिन तक अस्पताल के बाहर फुटपाथ पर रहा।’’ उन्होंने बताया कि डीएनए मिलान पूरा होने के बाद उनके परिवार को शव सौंप दिए गए।
इस बीच, अमेरिका स्थित विधि कंपनी चिओनुमा लॉ ने इस हादसे की स्वतंत्र जांच की मांग की और जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालने को लेकर आगाह किया। उसने दावा किया कि वह हादसे के 115 पीड़ित परिवारों का प्रतिनिधित्व कर रही है।
कंपनी के केस प्रबंधक आयुष राजपाल ने एक बयान में कहा, ‘‘यह बताया जाना कि कैप्टन सुमित सभरवाल का शव बैठी हुई मुद्रा में था और वह नियंत्रण यंत्र पकड़े हुए थे, गंभीर सवाल खड़ा करता है जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।’’
उन्होंने कहा, ‘‘जो पायलट अंतिम क्षण तक नियंत्रण संभाले हुए था, उसके बारे में अटकलों के आधार पर फैसला नहीं किया जाना चाहिए, खासकर तब जब वह खुद अपना बचाव करने के लिए जीवित नहीं है।’’
राजपाल ने कहा कि इस हादसे से जुड़े ‘‘हर तकनीकी, यांत्रिक, विद्युत और मानवीय पहलू’’ की जांच ‘‘वास्तव में स्वतंत्र विशेषज्ञों’’ द्वारा की जानी चाहिए, इससे पहले कि इस त्रासदी के लिए किसी ‘‘एक व्यक्ति’’ को दोषी ठहराया जाए।
वायुयान दुर्घटना अन्वेषण ब्यूरो (एएआईबी) ने पिछले वर्ष जुलाई में जारी अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा था कि विमान के इंजन के ईंधन नियंत्रण स्विच उड़ान भरने के कुछ सेकंड बाद बंद कर दिए गए थे। कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग में एक पायलट दूसरे से पूछता सुनाई देता है कि उसने ईंधन क्यों बंद किया, जिस पर दूसरा जवाब देता है कि उसने ऐसा नहीं किया।
पिछले वर्ष नवंबर में उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि इस हादसे के लिए किसी ने भी विमान के मुख्य पायलट को दोषी नहीं ठहराया है और उसने सभरवाल के 91 वर्षीय पिता से कहा था कि वह किसी प्रकार का भावनात्मक बोझ न लें।
भाषा गोला वैभव शोभना
शोभना

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