सीएक्यूएम ने एनसीआर में धूल नियंत्रण उपायों की निगरानी, प्रवर्तन का दायरा बढ़ाया

सीएक्यूएम ने एनसीआर में धूल नियंत्रण उपायों की निगरानी, प्रवर्तन का दायरा बढ़ाया

सीएक्यूएम ने एनसीआर में धूल नियंत्रण उपायों की निगरानी, प्रवर्तन का दायरा बढ़ाया
Modified Date: August 4, 2026 / 10:33 pm IST
Published Date: August 4, 2026 10:33 pm IST

नयी दिल्ली, चार अगस्त (भाषा) वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने जनवरी 2025 में जारी अपने वैधानिक निर्देश में संशोधन किया है, ताकि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में 500 वर्ग मीटर से कम क्षेत्रफल वाले निर्माण एवं ध्वस्तीकरण स्थलों पर धूल नियंत्रण संबंधी नियमों के उल्लंघन के खिलाफ कार्रवाई को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

इस संशोधन के तहत गंभीर उल्लंघन करने वालों के खिलाफ अभियोजन शुरू करने की शक्तियां अब अतिरिक्त नगर निगमों, विकास प्राधिकरणों, नगर परिषदों, नगरपालिका बोर्ड तथा शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) को भी प्रदान कर दी गई हैं। इससे एनसीआर में प्रवर्तन का दायरा और व्यापक हो गया है।

इन नए क्षेत्रों में मानेसर, करनाल, पानीपत, रोहतक, मेरठ, अलवर, भरतपुर, भिवाड़ी और नीमराना शामिल हैं।

जनवरी 2025 में जब यह वैधानिक निर्देश पहली बार जारी किया गया था, तब अभियोजन चलाने की शक्ति केवल दिल्ली नगर निगम (एमसीडी), नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एमडीएमसी) तथा गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और सोनीपत के विभिन्न शहरी स्थानीय निकायों के चुनिंदा अधिकारियों को दी गई थी।

इन अधिकारियों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में धूल एवं वायु प्रदूषण नियंत्रण तथा रोकथाम संबंधी निर्देशों या आदेशों के गंभीर उल्लंघन के मामलों में संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत दर्ज कराने का अधिकार दिया गया था।

इसके अलावा, उन्हें ऐसे निर्माण स्थलों को बंद करने का आदेश देने तथा गंभीर उल्लंघन की स्थिति में पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाने या उसकी वसूली करने का भी अधिकार दिया गया था।

पर्यावरण मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘यह देखते हुए कि एनसीआर के कई अन्य नगर निगमों और बड़े शहरों/कस्बों में भी 500 वर्ग मीटर से कम क्षेत्रफल वाले भूखंडों पर बड़ी संख्या में निर्माण कार्य चल रहे हैं, आयोग ने धूल नियंत्रण उपायों को पूरे क्षेत्र में अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने के उद्देश्य से प्रवर्तन व्यवस्था का विस्तार किया है।’’

भाषा शफीक सुरेश

सुरेश


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