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Caste Census Date: जणगणना के लिए तारीखों का ऐलान! इस दिन से हो सकती है शुरू, दो चरणों में होगी पूरी
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जणगणना के लिए तारीखों का ऐलान! इस दिन हो सकती है शुरू, Caste Census Date: Dates announced for census! It may start on this day, will be completed in two phases
नई दिल्लीः Caste Census Date: देश में जातिगणना को लेकर तारीखों का ऐलान हो गया है। बताया जा रहा है कि 1 मार्च 2027 से देश में जनगणना शुरू होगी। हालांकि, बर्फबारी वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जनगणना अगले साल अक्टूबर में ही शुरू हो जाएगी। इनमें लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड शामिल है। बाकी राज्यों में एक मार्च, 2027 से इसकी शुरुआत होगी।
Caste Census Date: बता दें कि देश में आमतौर पर हर दस साल में जनगणना होती रही है। आखिरी बार साल 2011 में जनगणना करवाई गई थी। इसके बाद 2021 में कोरोना महामारी की वजह से जनगणना को टाल दिया गया था। विपक्ष लगातार जाति जनगणना करवाने की मांग करता रहा है। कैबिनेट में मुहर लगने के बाद विपक्षी दलों ने भी सरकार के इस फैसले का स्वागत किया था।
1931 के बाद कभी प्रकाशित नहीं किए गए जातिगत जनगणना के आंकड़े
देश में जनगणना की शुरुआत 1881 में हुई थी। पहली बार हुई जनगणना में जातिगत जनगणना के आंकड़े जारी हुए थे। इसके बाद हर दस साल पर जनगणना होती रही। 1931 तक की जनगणना में हर बार जातिवार आंकड़े भी जारी किए गए। 1941 की जनगणना में जातिवार आंकड़े जुटाए गए थे, लेकिन इन्हें जारी नहीं किया गया। आजादी के बाद से हर बार की जनगणना में सरकार ने सिर्फ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के ही जाति आधारित आंकड़े जारी किए। अन्य जातियों के जातिवार आंकड़े 1931 के बाद कभी प्रकाशित नहीं किए गए।
जातिगत जनगणना 1 मार्च 2027 से देश के अधिकांश हिस्सों में शुरू होगी, जबकि हिमाचल, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में यह प्रक्रिया अक्टूबर 2026 से आरंभ की जाएगी।
पिछली जनगणना कब हुई थी और 2021 की जनगणना क्यों नहीं हुई?
आखिरी जनगणना 2011 में हुई थी। 2021 की जनगणना को कोरोना महामारी के कारण स्थगित कर दिया गया था।
क्या इस बार सभी जातियों की गिनती की जाएगी?
हाँ, इस बार की जनगणना में सभी जातियों के आंकड़े जुटाने और संभवतः प्रकाशित करने की योजना है, जो 1931 के बाद पहली बार होगा।
आजादी के बाद से जातिगत आंकड़े क्यों नहीं प्रकाशित किए गए?
आजादी के बाद सरकार ने सिर्फ अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के आंकड़े प्रकाशित किए। अन्य जातियों के आंकड़े 1931 के बाद से कभी सार्वजनिक नहीं किए गए।
क्या विपक्ष इस फैसले के समर्थन में है?
जी हाँ, विपक्षी दल लंबे समय से जातिगत जनगणना की मांग कर रहे थे और कैबिनेट में प्रस्ताव पास होने के बाद उन्होंने सरकार के फैसले का स्वागत किया है।