हैदराबाद, 17 अप्रैल (भाषा) तेलंगाना में कांग्रेस सरकार द्वारा 2024-25 में कराये गये जातिगत सर्वेक्षण से पता चलता है कि राज्यभर में 18 वर्ष से कम आयु के लगभग 89,000 बच्चे दिहाड़ी मजदूरी में लगे हुए हैं।
हाल में सार्वजनिक की गई सर्वेक्षण रिपोर्ट में कहा गया है कि इन 89,000 बाल श्रमिकों में से 14 प्रतिशत अनुसूचित जाति (एससी) मडिगा और 11 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति (एसटी) लंबाडी समुदाय से हैं, जो दैनिक मजदूरी पर काम करने वाली जातियों का प्रमुख हिस्सा हैं।
इसमें कहा गया है, ‘‘तेलंगाना में, 18 वर्ष से कम आयु के लगभग एक प्रतिशत लोग दिहाड़ी मजदूरी में लगे हुए पाये गये। एसटी कोलम समुदाय में यह दर सबसे अधिक 7.2 प्रतिशत है, जो गंभीर आर्थिक कठिनाई और शिक्षा एवं कल्याणकारी सहायता जैसी सुरक्षा प्रणालियों तक सीमित पहुंच को उजागर करती है।’’
तेलंगाना सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक, रोजगार, राजनीतिक और जाति (एसईईईपीसी) सर्वेक्षण-2024 में कहा गया है, ‘‘अगर हम इसे पूर्ण रूप से देखें तो, 18 वर्ष से कम आयु के 89,000 बच्चे दिहाड़ी मजदूर पाए गए।’’
औसतन, 25-65 आयु वर्ग के 31.3 लोग दैनिक मजदूरी पर काम करते हैं।
इसमें कहा गया है कि 56 प्रमुख जातियों में से बीसी-ए ओड्डे जाति का अनुपात सबसे अधिक 55 प्रतिशत है, जो गंभीर आर्थिक असुरक्षा की ओर इशारा करता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके विपरीत, ओसी ब्राह्मणों में से केवल 2.6 प्रतिशत ही दैनिक मजदूरी पर निर्भर हैं। इसमें कहा गया है कि यह स्पष्ट असमानता जातिगत समूहों में रोजगार की प्रकृति और गुणवत्ता में मौजूद गहरी असमानताओं को उजागर करती है।
इसमें कहा गया है कि राज्य में दैनिक वेतन भोगी श्रमिकों में अनुसूचित जाति कोलम, अनुसूचित जाति बेदा, अनुसूचित जाति मडिगा, अनुसूचित जनजाति कोया, अनुसूचित जनजाति गोंड, अनुसूचित जनजाति येरुकुला, अनुसूचित जाति माला सले जैसी कई अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों का हिस्सा सबसे अधिक है।
भाषा
देवेंद्र दिलीप
दिलीप