सीबीआई एवं डीआरआई ने वन्यजीव तस्करी रैकेट का भंडाफोड़ किया, छह व्यक्ति पकड़े गए
सीबीआई एवं डीआरआई ने वन्यजीव तस्करी रैकेट का भंडाफोड़ किया, छह व्यक्ति पकड़े गए
नयी दिल्ली, नौ जुलाई (भाषा) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) ने संयुक्त अभियान चलाकर अंतरराज्यीय वन्यजीव तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया और स्टार कछुओं, स्लो लोरिस, मिस्री गिद्धों तथा शिकरा पक्षियों समेत संरक्षित श्रेणी के 53 वन्यजीवों और पक्षियों को मुक्त कराया। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में मुंबई और कोलकाता से छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
सीबीआई ने एक बयान में कहा कि वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (डब्ल्यूसीसीबी) के सहयोग से चलाए गए इस अभियान में 15 स्लो लोरिस, दो बिंटूरोंग, 28 स्टार कछुए, छह मिस्री गिद्ध और दो शिकरा पक्षियों को मुक्त कराया गया। बयान में कहा गया है कि ये सभी वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 के तहत संरक्षित प्रजातियां हैं।
अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मुंबई के नोमान खान, मोहम्मद फारूक और इंशा शकील तथा कोलकाता के सैकत बिस्वास, मिथुन मंडल उर्फ हिमांशु मंडल और अर्जुन मंडल के रूप में हुई है।
उन्होंने बताया कि बचाए गए वन्यजीवों में स्लो लोरिस को संकटग्रस्त/अत्यंत संकटग्रस्त, मिस्री गिद्ध को संकटग्रस्त तथा बिंटूरोंग और स्टार कछुए को संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। उन्होंने बताया कि हालांकि, बचाई गई सभी प्रजातियों को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 के तहत भारत में सर्वोच्च कानूनी संरक्षण प्राप्त है।
अधिकारियों ने बताया कि डीआरआई, मुंबई द्वारा अंतरराज्यीय गिरोह के बारे में जुटाई गई विशेष खुफिया जानकारी के आधार पर महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में कई स्थानों पर यह कार्रवाई की गई।
एजेंसी ने कहा, ‘‘सीबीआई ने सात और आठ जुलाई, 2026 को दो अलग-अलग मामले दर्ज किए। मुंबई में तीन और कोलकाता में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।’’
एजेंसी ने बताया कि मामले वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 तथा भारतीय न्याय संहिता, 2023 में आपराधिक साजिश से संबंधित प्रावधानों के तहत दर्ज किए गए हैं।
बयान में कहा गया, ‘‘आरोपी इन जानवरों और पक्षियों को भारत के विभिन्न हिस्सों से एकत्र कर उनकी खरीद-फरोख्त करते थे।’’
मुक्त कराये गए सभी जानवरों और पक्षियों को प्रारंभिक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सुरक्षित संरक्षण के लिए महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के वन विभागों को सौंप दिया गया।
भाषा अमित पवनेश
पवनेश

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