हिरासत में मौत के मामले में सीबीआई को लापता वीडियोग्राफिक साक्ष्य बरामद करने का निर्देश
हिरासत में मौत के मामले में सीबीआई को लापता वीडियोग्राफिक साक्ष्य बरामद करने का निर्देश
प्रयागराज, 19 मई (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मैनपुरी में एक दिव्यांग व्यक्ति की कथित तौर पर पुलिस हिरासत में मौत के मामले में सीबीआई को लापता वीडियोग्राफिक साक्ष्य बरामद करने का निर्देश दिया है। अदालत ने इस मामले को संस्थागत विफलता का उदाहरण बताया है।
अदालत ने कहा, “यह मामला संस्थागत विफलता को उजागर करता है। वर्ष 2010 में दायर जनहित याचिका अब भी लंबित है। 16 साल बीत चुके हैं और घटनास्थल एवं पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफ इस अदालत को उपलब्ध नहीं कराए गए।”
न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की पीठ ने 2009 में नाहर सिंह नाम के एक दिव्यांग व्यक्ति की कथित तौर पर पुलिस हिरासत में हुई मौत के मामले में दायर एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए सोमवार को यह आदेश पारित किया। सिंह की मृत्यु मैनपुरी जिले के दन्नाहर पुलिस थाने में हुई थी।
शारीरिक रूप से 40 प्रतिशत दिव्यांग नाहर सिंह का शव नौ मई, 2009 को पुलिस हवालात के शौचालय में लटका हुआ मिला था। पुलिस ने दावा किया था कि नाहर ने अपनी बेल्ट से फंदा लगाकर आत्महत्या की।
हालांकि, अदालत ने इस आधिकारिक बयान पर यह कहते हुए सवाल उठाया कि पुलिस हवालात में निरंतर निगरानी रहती और यह कोई अलग स्थान नहीं है।
पीठ ने कहा कि यह मामला 2010 से लंबित रहने के बावजूद घटनास्थल की वीडियोग्राफी, फोटोग्राफ और पोस्टमार्टम रिपोर्ट समेत महत्वपूर्ण साक्ष्य आज तक इस अदालत के समक्ष पेश नहीं किए गए हैं।
यह जनहित याचिका महिलाओं और वंचित समुदायों के लिए काम करने वाले गैर सरकारी संगठन एसोसिएशन ऑफ वुमेन एंड मार्जिनलाइज्ड कम्युनिटीज (एएएलआई) ने दायर की है। याचिकाकर्ता के वकील अंकुर शर्मा ने प्रदेश में हिरासत में मौत के बढ़ते मामले का मुद्दा उठाया है।
अदालत ने गाजियाबाद में सीबीआई की भ्रष्टाचार रोधी इकाई को 60 दिन में लापता साक्ष्य हासिल करने और अगली तिथि 10 अगस्त को अदालत के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया।
भाषा सं राजेंद्र जोहेब
जोहेब

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