नयी दिल्ली, 13 मई (भाषा) सीबीआई ने दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) द्वारा रैन बसेरों के प्रबंधन के लिए अनुबंधित एक कंपनी के खिलाफ फर्जी कर्मचारियों को दिखाकर बिलों में हेराफेरी करने के आरोप में मामला दर्ज किया है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
एजेंसी ने सोफिया एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष सुहैल खान और अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। उसे शिकायत मिली थी कि डीयूएसआईबी को अत्यधिक बिल भेजा गया था जिसमें उन लोगों को कर्मचारी के रूप में दिखाया गया था जो या तो कहीं और कार्यरत थे या अन्य व्यवसायों में लगे हुए थे।
प्राथमिकी में आरोप लगाया गया, “डीयूएसआईबी के अंतर्गत रैन बसेरों के संचालन और प्रबंधन से संबंधित निविदाएं धोखाधड़ी से गैर सरकारी संगठनों/आश्रय प्रबंधन एजेंसियों को दी गईं, और फर्जी कर्मचारियों को रिकॉर्ड में शामिल करके गलत तरीके से लाभ कमाया गया जबकि वास्तव में उन्होंने कभी काम नहीं किया।”
इसमें कहा गया, “इसके परिणामस्वरूप सरकारी खजाने को अनुचित नुकसान हुआ, क्योंकि ऐसे फर्जी कर्मचारियों के वेतन बिलों का भुगतान दिल्ली सरकार के डीयूएसआईबी द्वारा किया गया था।”
यह कार्रवाई अनियमितताओं के आरोपों की सीबीआई द्वारा लगभग एक साल तक चली जांच के बाद की गई है। जांच के दौरान पता चला कि कई लोग, जो अन्य स्वतंत्र व्यवसायों और कारोबारों में लगे हुए थे या कहीं और कार्यरत थे, उन्हें गलत तरीके से रैन बसेरों में कर्मचारी के रूप में दिखाया गया था और बैंक खातों के माध्यम से वेतन का भुगतान किया गया था।
प्राथमिकी में कहा गया, “उनके पेशेवर कार्यों और मोबाइल लोकेशन डेटा के सत्यापन से यह स्थापित हुआ कि वे उस अवधि के दौरान अपने वास्तविक कार्यस्थलों या आवासों पर मौजूद थे, न कि किसी रैन बसेरे में, जिसके लिए उपस्थिति और वेतन दिखाया गया था।”
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