नयी दिल्ली, 13 मई (भाषा) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने नीट-यूजी पेपर लीक मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया है और देश भर में कई स्थानों पर तलाशी अभियान चला रहा है। परीक्षा रद्द किए जाने को लेकर विरोध प्रदर्शनों के साथ ही शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी तेज हो गई है।
जयपुर में गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से एक ने दावा किया कि प्रभावशाली लोगों को संरक्षण दिया जा रहा है जबकि आम लोगों को परेशान किया जा रहा है।
नीट-यूजी 2026 परीक्षा के संचालन में ‘‘प्रणालीगत विफलता’ का आरोप लगाते हुए ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन फेडरेशन (एफएआईएमए) ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की है और परीक्षा प्रणाली में सुधार का अनुरोध किया है।
सीबीआई ने जयपुर से मंगीलाल बिंवाल, विकास बिंवाल और दिनेश बिंवाल, गुरुग्राम से यश यादव और नासिक से शुभम खैरनार को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने बताया कि कई अन्य संदिग्धों से विभिन्न शहरों में पूछताछ की जा रही है और उन्हें बाद में गिरफ्तार किया जा सकता है।
इस मामले में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया, जिसमें कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस ने दावा किया कि गिरफ्तार किए गए कुछ लोग भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से जुड़े हुए थे। कुछ सोशल मीडिया अकाउंट ने ऐसी तस्वीरें साझा कीं जिनमें दिनेश को राजस्थान के वरिष्ठ भाजपा नेताओं और मंत्रियों के साथ दिखाया गया है।
दिनेश के परिवार के सदस्यों ने कहा कि उन्हें और उनके भाई को पुलिस ने पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था और दावा किया कि उन्हें झूठा फंसाया जा रहा है।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने कहा कि पेपर लीक और परीक्षा रद्द होना व्यवस्थागत खामियों का प्रमाण है। उन्होंने मांग की कि इस परीक्षा को समाप्त किया जाए और राज्यों को कक्षा 12वीं के अंकों के आधार पर स्वयं सीटें भरने की अनुमति दी जाए।
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु सरकार शुरू से ही नीट का लगातार और सर्वसम्मति से विरोध करती रही है, क्योंकि इसके लागू होने से ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र, सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी, तमिल माध्यम से पढ़ने वाले छात्र और सामाजिक-आर्थिक रूप से वंचित परिवारों के छात्र गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं।
स्नातक चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए तीन मई को आयोजित नीट यूजी 2026 की परीक्षा पेपर लीक के आरोपों के बीच मंगलवार को रद्द कर दी गई। इसकी जांच अब सीबीआई कर रही है। परीक्षा रद्द होने से 22 लाख से अधिक मेडिकल अभ्यर्थी और उनके परिवार अनिश्चितता की स्थिति में हैं।
बुधवार को कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हुए। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कई राज्यों में प्रदर्शन किए, जहां उन्होंने प्रधान के पुतले जलाए और उनके इस्तीफे तथा संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) द्वारा जांच की मांग की।
कई राजनीतिक दलों के छात्र संगठनों ने भी विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें एनएसयूआई, युवा कांग्रेस और आइसा के सदस्यों ने प्रधान के इस्तीफे की मांग की। एबीवीपी और एसएफआई के सदस्यों ने भी विरोध प्रदर्शन किया।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के खिलाफ नारे लगाते हुए, एबीवीपी के प्रदर्शनकारियों ने कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की और प्रतियोगी परीक्षाओं के संचालन में अधिक पारदर्शिता लाने का आह्वान किया।
शुरुआत में लीक की जांच करने वाले राजस्थान पुलिस के विशेष अभियान समूह (एसओजी) के अनुसार नीट-यूजी 2026 मेडिकल परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों से मिलते सवाल वाला ‘गेस पेपर’ मूल रूप से केरल के एक छात्र से यहां सीकर के छात्र को मिला था।
गिरफ्तार किए लोगों में खैरनार (30) को आगे की पूछताछ के लिए दिल्ली लाया जा रहा है, क्योंकि स्थानीय मजिस्ट्रेट अदालत ने सीबीआई को उसके लिए ‘ट्रांजिट रिमांड’ मंजूर कर ली है।
एक वाहन में दिल्ली लाते समय, जयपुर में एक आरोपी ने कहा, ‘‘बड़े लोगों को बचाया जाता है और आम आदमी को परेशान किया जाता है।’’
पुलिस सूत्रों के अनुसार, गुरुग्राम के फर्रुखनगर क्षेत्र के खेड़ा गांव का निवासी यादव बीएएमएस प्रथम वर्ष का छात्र है। वह सीकर में रहता था, जहां वह कोचिंग क्लास में जाता था और माना जाता है कि वहीं उसका कुछ लोगों से संपर्क हुआ।
सीबीआई ने संदिग्धों से मोबाइल फोन और लैपटॉप सहित कई डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं, जिन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा ताकि उन मैसेजिंग ऐप का पता लगाया जा सके जिनका इस्तेमाल प्रश्न पत्रों को भेजने के लिए किया गया हो।
सीबीआई की टीम ने बुधवार को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के मुख्यालय का दौरा किया जहां उसने नीट-यूजी परीक्षा से संबंधित दस्तावेज एकत्र किए।
महाराष्ट्र के लातूर जिले में पुलिस ने नीट यूजी के प्रश्न पत्र लीक के संबंध में कोचिंग कक्षा के कर्मचारियों सहित छह लोगों से पूछताछ की है।
लातूर शहर कोचिंग के केंद्र के रूप में जाना जाता है और पूरे महाराष्ट्र से छात्र कोचिंग के लिए यहां आते हैं।
संभागीय पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) समीर सिंह साल्वे ने ‘पीटीआई भाषा’ को बताया कि कुल छह लोगों से पूछताछ की गई और उनके बयान दर्ज किए गए।
वहीं, एसओजी के महानिरीक्षक अजय पाल लांबा ने बताया कि सीकर के छात्र को यह सामग्री सबसे पहले अपने एक दोस्त से मिली जिसे उसने इसे सीकर में दूसरों के साथ साझा किया। उन्होंने बताया कि इसके बाद यह दस्तावेज कोचिंग कर रहे कई छात्रों तक पहुंचा और फिर तीन मई को परीक्षा से पहले जयपुर और आस-पास के इलाकों के अभ्यर्थियों तक भी पहुंच गया।
एक अन्य अधिकारी ने बताया कि केरल वाले छात्र ने यह ‘गेस पेपर’ सीकर के एक हॉस्टल मालिक और अपने कुछ दोस्तों को भेजा।
उन्होंने बताया कि हॉस्टल मालिक ने हॉस्टल में रहने वाले छात्रों के साथ यह ‘गेस पेपर’ साझा करते हुए कहा था कि यह उनके काम आ सकता है।
उन्होंने बताया कि हालांकि, बाद में खुद हॉस्टल मालिक ने ही स्थानीय पुलिस को इस ‘गेस पेपर’ के बारे में सूचना दी। अधिकारी ने बताया कि उसने बताया था कि बड़ी संख्या में छात्रों को एक ‘क्वेश्चन बैंक’ (प्रश्न संग्रह) बांटा गया है।
अधिकारियों ने बताया कि राजस्थान पहुंचने से पहले यह सामग्री कथित तौर पर हरियाणा के गुरुग्राम में रहने वाले एक व्यक्ति के जरिए भेजी गई थी।
नीट पेपर लीक की अफवाहों से जुड़ी जानकारियों पर कार्रवाई करते हुए सीकर, झुंझुनू, अलवर, जयपुर शहर, जयपुर ग्रामीण और एसओजी की संयुक्त पुलिस टीम ने 150 से अधिक अभ्यर्थियों, उनके दोस्तों और माता-पिता से पूछताछ की।
सूत्रों के मुताबिक, आशंका है कि प्रश्नपत्र नासिक से लीक हुए थे।
मंगलवार देर शाम सीबीआई की एक टीम जांच अपने हाथ में लेने के लिए एसओजी कार्यालय पहुंची।
आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को ‘जेन जेड’ से अपील की कि वे नीट परीक्षापत्र लीक के कथित दोषियों को न्याय के कठघरे में लाना सुनिश्चित करें। केजरीवाल ने कहा कि अगर बांग्लादेश और नेपाल के युवा राजनीतिक बदलाव ला सकते हैं, तो भारतीय छात्र भी जवाबदेही तय करने के लिए दबाव डाल सकते हैं।
केजरीवाल ने 2014 से अब तक परीक्षा पत्र लीक होने की घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि इसने करोड़ों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है।
‘जेन जेड’ उस पीढ़ी को कहा जाता है जो 1997 से 2012 के बीच पैदा हुई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासित राज्यों में ऐसी कई घटनाएं हुई हैं।
इस बीच, राजस्थान के नगरीय विकास एवं आवासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने घटना पर खेद जताते हुए कहा कि परीक्षा रद्द होने से मेहनती विद्यार्थियों को नुकसान उठाना पड़ा।
खर्रा ने झुंझुनूं में पत्रकारों से कहा, “जिन विद्यार्थियों ने ईमानदारी से तैयारी की है, उन्हें प्रश्न पत्र लीक से सबसे अधिक नुकसान हुआ है। परीक्षा अगले दो-तीन महीनों में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच दोबारा की जाएगी।”
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रश्न पत्र ‘लीक’ होने के मामले को लेकर भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि इस प्रकरण से सत्तारूढ़ दल की पोल खुल गई है।
पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में दावा किया, “नीट प्रश्न पत्र लीक में गिरफ्तार आरोपी दिनेश बिंवाल भारतीय जनता पार्टी का पदाधिकारी है। क्या यही वजह है कि राजस्थान की भाजपा सरकार ने इस मामले को छिपाने का प्रयास किया एवं कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की?”
गहलोत ने दिनेश के एक पोस्टर की तस्वीर पोस्ट की जिसमें उसे जयपुर ग्रामीण में भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के जिला सचिव के रूप में दिखाया गया है।
तृणमूल कांग्रेस सांसद कीर्ति आजाद ने दावा किया है कि राजस्थान के दो आरोपियों के भाजपा नेताओं और मंत्रियों से संबंध हैं।
उन्होंने आरोप लगाया, “अब यह स्पष्ट हो गया है कि दिनेश बिंवाल और मंगीलाल बिंवाल राजस्थान के हैं और उन्हें भाजपा नेताओं और मंत्रियों के साथ देखा गया है। उन्होंने इसके लिए तीन लाख रुपये दिए और जानकारी लीक की। कहा जा रहा है कि उनके दिल्ली के शिक्षा मंत्रालय से भी संबंध हो सकते हैं।”
भाजपा की प्रदेश इकाई के उपाध्यक्ष मुकेश दाधीच ने कहा कि बिंवाल के पास पार्टी में कोई पद नहीं है।
भाषा आशीष प्रशांत
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