केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय बैंकाक में अपना विदेशी अध्ययन स्थापित करेगा
केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय बैंकाक में अपना विदेशी अध्ययन स्थापित करेगा
नयी दिल्ली, तीन अगस्त (भाषा) केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने थाइलैंड की राजधानी बैंकाक में अपना विदेशी अध्ययन केंद्र स्थापित करने के लिए सोमवार को सिल्पाकोर्न विश्वविद्यालय से समझौता किया।
विश्वविद्यालय ने यहां जारी एक बयान में कहा कि थाइलैंड में भारतीय राजदूत पुनीत अग्रवाल की मौजूदगी में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय और बैंकाक स्थित सिल्पाकोर्न विश्वविद्यालय (वांग था फ्रा कैम्पस) के बीच एक समझौता (एमओयू) हुआ।
इस दौरान केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेडी व सिल्पाकोर्न विश्वविद्यालय के अध्यक्ष प्रो. तनसेत न्गॉहिरनपत समेत दोनों देशों के कई शिक्षाविद और अन्य लोग मौजूद थे।
इस समझौते के तहत सिल्पाकोर्न विश्वविद्यालय में स्थापित संस्कृत अध्ययन केंद्र को केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के विदेशी अध्ययन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
बयान के अनुसार, यह नई पहल अब संस्कृत, भारतीय ज्ञान प्रणाली और विदेशों में भारतीय संस्कृति के प्रचार के लिए एक संस्थागत ढांचा प्रदान करेगी।
समझौते के तहत, दोनों विश्वविद्यालय संकाय और छात्र आदान-प्रदान कार्यक्रम, संयुक्त शिक्षण और अनुसंधान, संयुक्त डिग्री कार्यक्रम और संस्कृत, पाली, हिंदी तथा भारतीय ज्ञान प्रणालियों पर आधारित ऑनलाइन पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देंगे।
बयान में कहा गया है कि इसके तहत रामायण अध्ययन, बौद्ध अध्ययन, संस्कृत पुरालेख, योग, वास्तु शास्त्र, ज्योतिष, ब्राह्मी लिपि और भारतीय दर्शन जैसे विषयों में संयुक्त अनुसंधान और प्रकाशन को प्रोत्साहित किया जाएगा।
इसमें कहा गया है कि संस्कृत, पाली और प्राकृत पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण, ई-संसाधनों के निर्माण और आधुनिक डिजिटल संस्कृत तंत्र के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
श्रीनिवास वरखेडी ने कहा कि यह समझौता महज दो विश्वविद्यालयों के बीच साझेदारी नहीं है, बल्कि भारत और थाइलैंड के ज्ञान, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत को जोड़ने वाला एक मजबूत पुल है।
उन्होंने कहा कि सिल्पाकोर्न विश्वविद्यालय में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के विदेशी अध्ययन केंद्र की स्थापना पूरे दक्षिण पूर्व एशिया में संस्कृत, पाली और भारतीय ज्ञान प्रणाली के विस्तार के लिए प्राथमिक आधार के रूप में काम करेगी।
भाषा नोमान
नोमान नरेश
नरेश

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