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नयी दिल्ली, 17 जनवरी (भाषा) पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शनिवार को कहा कि राज्य के सीमा क्षेत्र के किसानों को बड़ी राहत मिली है, क्योंकि केंद्र ने अंतरराष्ट्रीय सरहद के करीब सुरक्षा बाड़ को स्थानांतरित करने के लिए सैद्धांतिक सहमति दे दी है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद मान ने कहा कि इस कदम से हजारों एकड़ कृषि भूमि पर निर्बाध खेती का रास्ता साफ हो जाएगा, जो वर्तमान में बाड़बंदी के बाहर फंसी हुई है।
पंजाब के मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को लंबे समय से अपनी पहचान पत्र लेकर और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की सुरक्षा में बाड़ पार कर अपने खेतों तक पहुंचना पड़ता था। उन्होंने कहा कि इससे किसानों को 532 किलोमीटर लंबी भारत-पाक सीमा पर रोजाना कठिनाइयों और अनिश्चितताओं का सामना करना पड़ता है जहां बाड़ पंजाब के क्षेत्र में काफी अंदर तक स्थित है।
मान ने कहा कि बैठक के दौरान गृह मंत्री ने उन्हें सूचित किया कि इस मुद्दे पर सक्रियता से विचार किया जा रहा है और बाड़ को सीमा की ओर स्थानांतरित किया जाएगा, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता किए बिना पंजाब की भूमि तक पहुंच सुलभ हो जाएगी।
सीमा विवाद के साथ-साथ, मुख्यमंत्री मान ने कई लंबित मुद्दों को भी उठाया, जिनमें प्रस्तावित बीज विधेयक 2025 पर पंजाब की आपत्तियां, सतलुज यमुना लिंक (एसवाईएल) विवाद का अनसुलझा रहना, भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा खाद्यान्न की धीमी ढुलाई, आढ़तिया कमीशन पर रोक, ग्रामीण विकास कोष (आरडीएफ) और मंडी कोष का भुगतान न होना और चंडीगढ़ प्रशासन में पंजाब की भूमिका में कटौती शामिल हैं। उन्होंने इन मामलों के शीघ्र और समयबद्ध समाधान की मांग की।
प्रस्तावित बीज विधेयक 2025 पर आपत्ति जताते हुए मान ने कहा, ‘‘पंजाब एक कृषि प्रधान राज्य है और देश के सबसे बड़े अनाज उत्पादक राज्यों में से एक है, फिर भी बीज विधेयक के मसौदे में संबंधित धारा के तहत राज्य के प्रतिनिधित्व का आश्वासन नहीं दिया गया है।’’
मान ने कहा कि विधेयक को उसके वर्तमान स्वरूप में संसद के समक्ष नहीं लाया जाना चाहिए, और केंद्रीय गृह मंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया कि चिंताओं पर गौर किया जाएगा।
नदी जल को लेकर पंजाब के रुख को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘पंजाब के पास किसी भी अन्य राज्य के साथ साझा करने के लिए अतिरिक्त जल नहीं है। सतलुज, रावी और ब्यास नदियों के जल की उपलब्धता में काफी कमी आई है, इसलिए सतलुज यमुना लिंक नहर का निर्माण व्यवहारिक नहीं है।’’
भाषा आशीष धीरज
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