पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत का आरोप, अमेरिकी दबाव में यूपीआई शुल्क पर केंद्र ने बदला रुख

पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत का आरोप, अमेरिकी दबाव में यूपीआई शुल्क पर केंद्र ने बदला रुख

पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत का आरोप, अमेरिकी दबाव में यूपीआई शुल्क पर केंद्र ने बदला रुख
Modified Date: September 17, 2026 / 02:40 pm IST
Published Date: September 17, 2026 2:40 pm IST

(फाइल फोटो के साथ)

जयपुर, 17 सितंबर (भाषा) राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि अमेरिका के दबाव में केंद्र सरकार ने यूपीआई लेनदेन पर शुल्क को लेकर अपना रुख बदला है और इससे आम उपभोक्ताओं एवं छोटे कारोबारियों पर असर पड़ेगा।

वरिष्ठ कांग्रेस गहलोत ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में यूपीआई लेनदेन पर ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (एमडीआर) को लेकर केंद्र के पहले के रुख, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (यूएसटीआर) की रिपोर्ट और सरकार के हालिया फैसले के बीच के घटनाक्रम का जिक्र किया।

गहलोत ने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने 11 जून 2025 को यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर लगाए जाने संबंधी खबरों को ‘‘झूठा, निराधार और भ्रामक’’ बताया था तथा डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई थी।

उन्होंने दावा किया कि इस साल मार्च में अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय के अधीन काम करने वाली संस्था अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (यूएसटीआर) ने भारत की यूपीआई नीति को वीजा और मास्टरकार्ड जैसी अमेरिकी भुगतान कंपनियों के लिए नुकसानदेह बताया था।

गहलोत ने आरोप लगाया कि इसके बाद केंद्र ने सितंबर में 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा की।

गहलोत ने कहा, ‘‘भारत के लोगों को इस घटनाक्रम को समझना चाहिए।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने कुछ ही महीनों के भीतर अमेरिका सरकार और अमेरिकी कंपनियों के दबाव में अपना रुख बदल लिया।

गहलोत ने कहा कि यही बात नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बार-बार देशवासियों को समझा रहे हैं कि मोदी सरकार भारत की जनता की बजाय अमेरिका की सरकार के इशारों पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि यह फायदा अमेरिका का है और नुकसान भारत की जनता का, ऐसे में यह कैसा आत्मनिर्भर भारत है।

उन्होंने दावा किया कि इस पूरे फैसले का नुकसान सीधे आम जनता और छोटे व्यापारियों को भरना पड़ेगा, जबकि फायदा वीजा-मास्टरकार्ड जैसी अमेरिकी कंपनियों को मिलेगा।

हालांकि, केंद्र सरकार ने अमेरिकी दबाव के आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि यूपीआई शुल्क से संबंधित फैसला किसी विदेशी प्रभाव के कारण नहीं लिया गया है। सरकार के अनुसार, 2,000 रुपये तक के छोटे यूपीआई लेनदेन पर शुल्क नहीं लगेगा और उपभोक्ताओं से सीधे शुल्क वसूलने की अनुमति नहीं होगी।

भाषा बाकोलिया मनीषा राजकुमार

राजकुमार


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