कश्मीर की जेलों से बंदियों को स्थानांतरित करने के खिलाफ याचिका पर केंद्र, जम्मू कश्मीर से जवाब तलब

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कश्मीर की जेलों से बंदियों को स्थानांतरित करने के खिलाफ याचिका पर केंद्र, जम्मू कश्मीर से जवाब तलब

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  • Publish Date - November 4, 2022 / 07:43 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:43 PM IST

नयी दिल्ली, चार नवंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सार्वजनिक सुरक्षा कानून (पीएसए) के तहत हिरासत में लिये गये 20 से अधिक लोगों को जम्मू-कश्मीर की जेलों से उत्तर प्रदेश और हरियाणा की जेलों में स्थानांतरित करने के आरोप संबंधी याचिका पर शुक्रवार को केंद्र सरकार, जम्मू-कश्मीर प्रशासन और अन्य से जवाब मांगा।

प्रधान न्यायाधीश उदय उमेश ललित और बेला एम. त्रिवेदी की पीठ ने चार बंदियों के रिश्तेदारों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्विस की इन दलीलों का संज्ञान लिया कि उन्हें (बंदियों को) जम्मू-कश्मीर की जेलों से बाहर स्थानांतरित कर दिया गया है और इस तरह उनके रिश्तेदारों को उनसे मिलने के अवसरों से वंचित कर दिया गया है।

गोंजाल्विस ने कहा कि स्थानीय कानून के तहत हिरासत में लिये गए लोगों को केंद्र शासित प्रदेश से बाहर नहीं ले जाया जा सकता, क्योंकि यह क़ानून केवल केंद्र शासित प्रदेश पर लागू होता है।

बंदियों को जम्मू और कश्मीर सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम, 1978 के प्रावधानों के तहत एहतियातन हिरासत में रखा गया है।

यह याचिका राजा बेगम नामक महिला और तीन अन्य ने वकील सत्य मित्रा के माध्यम से दायर की है।

श्रीनगर के परिमपोरा की रहने वाली बेगम के बेटे आरिफ अहमद शेख को उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित सेंट्रल जेल में स्थानांतरित कर दिया गया है। उन्हें सात अप्रैल को पीएसए के तहत हिरासत में लिया गया था।

भाषा सुरेश पवनेश

पवनेश