नयी दिल्ली, 16 जुलाई (भाषा) दिल्ली की जेलों में रिश्वतखोरी का गिरोह चलाने के आरोप में एक सहायक अधीक्षक, छह वार्डर, दो अधिवक्ताओं सहित 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) के एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
अधिकारी ने कहा कि आरोपियों ने विचाराधीन कैदियों के परिवारों को जेल के अंदर सुरक्षा, विशेष रियायत और अन्य अनधिकृत सुविधाओं की खातिर पैसे देने के लिए कथित तौर पर मजबूर किया।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, इस साल नौ फरवरी को एसीबी को एक व्यक्ति से शिकायत मिलने के बाद मामला दर्ज किया गया था। इस शिकायत में आरोप लगाया गया था कि रोहिणी जेल में विचाराधीन कैदियों के रूप में बंद उसके पिता और भाई की ‘सुरक्षा’ और ‘आराम’ के लिए उसे नियमित भुगतान करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
इसके बाद, आरोपों की जांच के लिए एक टीम का गठन किया गया, जिसने आरोपियों को पकड़ने के लिए जाल बिछाया।
संयुक्त पुलिस आयुक्त और एसीबी प्रमुख विक्रमजीत सिंह ने बयान में कहा, ‘अभियान के दौरान, अधिकारियों ने गिरोह के सदस्यों को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा।’
बयान में कहा गया है कि एजेंसी ने शुरुआत में छह लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनमें रोहिणी जेल में तैनात वार्डर दिनेश डबास, पंकज कुमार और रवि कुमार, तिहाड़ जेल में तैनात हेड वार्डर जोगेंद्र, फरीदाबाद के अधिवक्ता मनीष शामिल हैं।
जांच के दौरान, एसीबी ने एक बड़े आपराधिक षड्यंत्र का खुलासा किया, जिसमें जेल अधिकारी, कैदी, अधिवक्ता और अन्य व्यक्ति शामिल थे और ये एक संगठित गिरोह के रूप में काम कर रहे थे।
बयान में कहा गया, ‘टीमों ने बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन, डिजिटल साक्ष्यों और मोबाइल फोन डेटा का विश्लेषण किया, जिससे पता चला कि कैदियों के परिवारों से लिए गए अवैध पैसों को पहले कई बैंक खातों में जमा कराया गया और बाद में उन्हें निकाल कर आपस में बांट लिया गया।”
साक्ष्यों के आधार पर, एसीबी ने पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनमें रोहिणी जेल में तैनात सहायक अधीक्षक सुनील कुमार, रोहिणी जेल में हेड वार्डर योगेश, रोहिणी जेल में वार्डर जगबीर, उत्तर प्रदेश के बागपत के अधिवक्ता हरेंद्र बंसल और दिल्ली निवासी विप्लव खारी शामिल हैं।
बयान में कहा गया, ‘इन गिरफ्तारियों के साथ, मामले में पकड़े गए आरोपियों की संख्या बढ़कर 11 हो गई है।’’
एसीबी ने कहा कि कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने, पैसे के लेन-देन और पूरी साजिश का पता लगाने के लिए जांच जारी है।
भाषा नोमान
नोमान अविनाश
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