सरकारी पैनल में महिला वकीलों के लिए 30 प्रतिशत आरक्षण संबंधी याचिका पर केंद्र, राज्यों को नोटिस

सरकारी पैनल में महिला वकीलों के लिए 30 प्रतिशत आरक्षण संबंधी याचिका पर केंद्र, राज्यों को नोटिस

सरकारी पैनल में महिला वकीलों के लिए 30 प्रतिशत आरक्षण संबंधी याचिका पर केंद्र, राज्यों को नोटिस
Modified Date: May 20, 2026 / 12:41 pm IST
Published Date: May 20, 2026 12:41 pm IST

नयी दिल्ली, 20 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को सरकारी पैनल और विधि अधिकारी पदों में महिला वकीलों के लिए 30 प्रतिशत आरक्षण का अनुरोध करने वाली जनहित याचिका पर केंद्र, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जवाब मांगा है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता और उच्चतम न्यायालय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह की दलीलों पर गौर किया और लाडली फाउंडेशन ट्रस्ट द्वारा दायर जनहित याचिका पर केंद्र और अन्य को नोटिस जारी किए।

इस जनहित याचिका में केंद्र, राज्य सरकारों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) को सर्वोच्च अदालत के पैनल से लेकर स्थानीय कानूनी सहायता प्राधिकरणों तक, सभी कानूनी स्तरों पर महिलाओं के लिए न्यूनतम 30 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

इस याचिका में चौंकाने वाले अनुभवजन्य साक्ष्यों का हवाला देते हुए कहा गया है कि जहां एक ओर महिलाएं रिकॉर्ड संख्या में लॉ स्कूलों में प्रवेश ले रही हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हें पेशेवर उन्नति से व्यवस्थित रूप से रोका जा रहा है।

याचिका में कहा गया, ‘‘याचिकाकर्ता, लाडली फाउंडेशन ट्रस्ट (ट्रस्ट) संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत यह जनहित याचिका दायर कर रहा है, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय पैनल, उच्च न्यायालय पैनल, सरकारी विधि अधिकारी पद, कानूनी सहायता पैनल और सभी केंद्रीय एवं राज्य सरकार, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के पैनल सहित सभी सरकारी पैनलों में महिला अधिवक्ताओं के लिए न्यूनतम 30 प्रतिशत आरक्षण या प्रतिनिधित्व के लिए उचित रिट, आदेश या निर्देश जारी करने की मांग की गई है, ताकि संविधान के अनुच्छेद 14, 15(3), 19(1)(जी) और 21 के तहत गारंटीकृत मौलिक अधिकारों का प्रभावी प्रवर्तन सुनिश्चित किया जा सके।’’

भाषा शोभना मनीषा

मनीषा


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