रूस-यूक्रेन युद्ध से पीड़ित भारतीयों की सहायता के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करे केंद्र: न्यायालय
रूस-यूक्रेन युद्ध से पीड़ित भारतीयों की सहायता के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करे केंद्र: न्यायालय
नयी दिल्ली, 31 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह विदेश मंत्रालय में एक नोडल अधिकारी नियुक्त करे, जो रूस-यूक्रेन युद्ध में मारे गए, लापता हुए या घायल हुए भारतीयों के परिजनों के साथ समन्वय स्थापित करेगा।
भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने विदेश मंत्रालय को यह भी निर्देश दिया कि मारे गए लोगों से उनके परिजनों के डीएनए के मिलान की व्यवस्था की जाए।
पीठ उन भारतीय नागरिकों से जुड़ी याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिन्हें ट्रैवल एजेंटों द्वारा कथित तौर पर धोखा देकर रूसी सेना में भर्ती कराया गया था। याचिका में मृतकों के पार्थिव शरीर वापस लाने, मुआवज़े और प्रभावित परिवारों के लिए एक समन्वित तंत्र बनाए जाने का अनुरोध किया गया है।
पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील और केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी की दलीलें सुनीं और कई निर्देश जारी किए।
पीठ ने कहा, ‘‘विदेश मंत्रालय एक अधिकारी को नोडल अधिकारी के तौर पर अधिसूचित करेगा। इस अधिकारी से जुड़ी जानकारी और उसका संपर्क नंबर उन भारतीय नागरिकों के परिवारों के साथ साझा किया जाए जो रूस गए थे… और जिनकी मौत हो गई या जो घायल हो गए।’’
इसने विदेश मंत्रालय से कहा कि वह मृतकों के परिवार वालों के डीएनए की जांच का इंतजाम करे और डीएनए का मिलान होने पर शव सौंपने की प्रक्रिया पूरी करे।
इसने मंत्रालय से यह भी कहा कि वह यह सुनिश्चित करे कि पीड़ित परिवारों को रूसी सरकार से मुआवजा पाने के लिए जरूरी दस्तावेजों की जानकारी दी जाए।
पीठ ने विदेश मंत्रालय से कहा कि वह प्रभावित परिवारों को नयी दिल्ली स्थित रूसी दूतावास में मुआवजे के दावे दाखिल करने में सहायता प्रदान करे तथा मामले से संबंधित सभी आवश्यक जानकारी और अद्यतन सूचनाएं स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध कराए।
पीठ ने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणों को भी निर्देश दिया कि वे परिजनों को शव प्राप्त करने और मुआवजे के दावे दाखिल करने में हरसंभव सहायता प्रदान करें।
ये निर्देश उस याचिका पर सुनवाई के दौरान दिए गए, जिसे उन लोगों के परिजनों ने दायर किया था, जिनकी रूस-यूक्रेन युद्ध में लड़ने के लिए भर्ती किए जाने के बाद कथित रूप से मौत हो गई या वे लापता हो गए।
याचिका में कहा गया कि कई लोगों को ट्रैवल एजेंटों ने धोखे से रूस भेजा और उन्हें युद्ध में लड़ने के लिए मजबूर किया गया।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि ताजा जानकारी के मुताबिक, 219 लोगों ने युद्ध में हिस्सा लिया था और 51 लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने बताया कि 20 लोगों को वापस लाया गया है।
पीठ ने अपने आदेश में कहा कि 200 से अधिक लोग जिनमें से अधिकतर राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के रहने वाले थे, 2024-25 में आतिथ्य समेत अलग-अलग क्षेत्र में काम करने के लिए रूस गए थे।
पीठ ने कहा कि आरोप है कि ट्रैवल एजेंटों ने उन्हें धोखा दिया और रूस पहुंचने पर उनके पासपोर्ट और अन्य दस्तावेज जब्त कर लिए गए।
पीठ ने यह भी बताया कि उन्हें रूसी सेना में भर्ती किया गया और युद्ध वाले इलाकों में भेज दिया गया।
पीठ ने कहा, ‘‘दुर्भाग्य से कई लोगों की जान चली गई और जरूरी जांच-पड़ताल के बाद उनमें से कई लोगों के शव भारत लाए गए हैं।’’ पीठ ने यह भी कहा कि कई परिवारों को अभी मुआवजा मिलना बाकी है।
इसके पहले केंद्र ने कहा था कि 21 लोगों के करीबी परिजनों के डीएनए नमूने पहले ही ले लिए गए हैं और इनको शवों की पहचान करने और लापता लोगों का पता लगाने में मदद के लिए रूसी अधिकारियों के साथ साझा किया गया है।
भाषा संतोष पवनेश
पवनेश

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