नयी दिल्ली, 14 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को केंद्र सरकार से उस याचिका पर चार हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा, जिसमें राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) अधिनियम, 2008 की वैधता को चुनौती दी गई है।
केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ से कहा कि सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए कुछ समय चाहिए।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने कहा कि इस याचिका पर 21 अप्रैल को नोटिस जारी किया गया था।
पीठ ने केंद्र को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया। उसने कहा कि याचिकाकर्ता इसके बाद दो हफ्ते के भीतर ‘रिजॉइंडर’ (यदि कोई हो तो) दाखिल कर सकता है।
पीठ ने कहा कि याचिका को छह हफ्ते बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।
उच्चतम न्यायालय ने 21 अप्रैल को इस याचिका पर केंद्र, एनआईए और अन्य से जवाब तलब किया था। शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की थी कि उसके समक्ष उठाए गए प्रश्न बेहद महत्वपूर्ण हैं।
याचिका में एनआईए अधिनियम, 2008 को रद्द करने का अनुरोध करते हुए दावा किया गया है कि यह कानून भारतीय संविधान के अनुच्छेद-14 (कानून के समक्ष समानता) का “उल्लंघन” करता है और केंद्र की विधायी क्षमता से परे है।
याचिका में कहा गया है कि 26/11 के मुंबई आतंकवादी हमलों के बाद इस अधिनियम के तहत एनआईए का गठन एक केंद्रीय आतंकवाद-रोधी कानून प्रवर्तन एजेंसी के रूप में किया गया था।
इसमें कहा गया है कि ‘पुलिस’ राज्य सूची के अंतर्गत आती है।
याचिका में अधिनियम की धारा 6 (5) का भी जिक्र किया गया है, जो अनुसूचित अपराधों की जांच से संबंधित है और कहती है कि अगर केंद्र सरकार की राय है कि कोई अनुसूचित अपराध किया गया है, जिसकी जांच इस अधिनियम के तहत आवश्यक है, तो वह स्वतः संज्ञान लेते हुए संबंधित एजेंसी को इसकी जांच करने का निर्देश दे सकती है।
भाषा प्रचेता पारुल
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