कोविड-19 प्रबंधन में उच्चतम न्यायालय के हस्तक्षेप पर केंद्र की आपत्ति उचित नहीं : झारखंड सरकार

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कोविड-19 प्रबंधन में उच्चतम न्यायालय के हस्तक्षेप पर केंद्र की आपत्ति उचित नहीं : झारखंड सरकार

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  • Publish Date - May 22, 2021 / 07:59 AM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:31 PM IST

(मनोहर लाल)

नयी दिल्ली, 22 मई (भाषा) झारखंड सरकार ने कोविड-19 प्रबंधन को लेकर उच्चतम न्यायालय द्वारा समय पर हस्तक्षेप किए जाने का स्वागत किया है और कहा कि इससे महामारी के मद्देनजर ऑक्सीजन तथा जरूरी दवाओं का उचित वितरण हो सका।

राज्य सरकार ने इसके साथ ही उच्चतम न्यायालय के निर्णय पर केंद्र द्वारा जताई गई आपत्ति की भी आलोचना की और इसे न्यायिक प्रकिया में ‘अनुपयुक्त एवं अवांछित’ हस्तक्षेप करार दिया।

झामुमो-कांग्रेस सरकार कोविड-19 की दूसरी लहर के मद्देनजर उच्चतम न्यायालय द्वारा न्यायिक समीक्षा और न्याधिकार का इस्तेमाल कर दवाओं, ऑक्सीजन और टीके की आपूर्ति पर स्वत: संज्ञान लेने पर केंद्र की आपत्ति की आलोचक रही की।

महामारी के दौरान आवश्यक वस्तुओं एवं सेवाओं की आपूर्ति पर स्वत: संज्ञान लेकर अदालत द्वारा की जा रहा सुनवाई पर झारखंड सरकार ने हलफनामा दाखिल किया है।

इस मामले में केंद्र सरकार ने नौ मई को अदालत में कोविड-19 के टीकाकरण और महामारी से निपटने की अपनी नीति का बचाव करते हुए कहा कि किसी भी अति उत्साही, भले अच्छे उद्देश्य से न्यायिक हस्तक्षेप किया गया हो, अप्रत्याशित एवं अनपेक्षित नतीजे दे सकते हैं।

राज्य सरकार ने भी हस्तक्षेप करने की अर्जी दाखिल कर अदालत से अनुरोध किया कि वह राज्य में तीसरे चरण की टीकाकरण नीति के तहत कोविन पोर्टल पर पंजीककरण की अनिवार्यता को समाप्त करने का निर्देश केंद्र सरकार को दे।

एडवोकेट जनरल राजीव रंजन और अतरिक्त एडवोकेट जनरल अरुनाभ चौधरी के जरिये दाखिल हलफनामे में राज्य सरकार ने कहा कि, ‘‘ केंद्र द्वारा नौ मई 2021 को दाखिल हलफनामे के जरिये मौजूदा मामले में न्यायिक समीक्षा की संभावना और इस अदालत के न्ययाधिकार के इस्तेमाल पर जताई गई आपत्ति ‘अनुपयुक्त और अवांछित है।’’

भाषा धीरज नेत्रपाल शाहिद

शाहिद