नई दिल्लीः Chandrashekhar Azad on Dhirendra Shastri: मध्यप्रदेश के छतरपुर वाले बाबा बागेश्वर इन दिनों महाराष्ट्र के दौरे पर हैं। इस दौरान उन्होंने एक ऐसा बयान दे दिया है, जिसे लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। कई राजनेता उन पर निशाना साध रहे हैं। भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर आजाद ने उन्हें पीएम मोदी के ‘मुँहबोले छोटे भाई’ तक करार दे दिया। उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज के गौरव को ठेस पहुँचाने वाली किसी भी सोच और साजिश को देश का जागरूक समाज कभी स्वीकार नहीं करेगा।
दरअसल, धीरेंद्र शास्त्री ने कहा था कि छत्रपति शिवाजी महाराज को लेकर दावा किया कि “छत्रपति शिवाजी महाराज लगातार लड़ाइयों से थक गए थे और समर्थ रामदास स्वामी के पास गए। उन्होंने अपना मुकुट उतारकर संत के चरणों में रख दिया और उनसे राज्य का शासन संभालने का आग्रह किया। इसे लेकर आर्मी के चीफ चंद्रशेखर आजाद ने एक्स पर लिखा कि परम प्रतापी योद्धा, अद्भुत साहस, दूरदर्शी रणनीति और जनकल्याणकारी शासन के प्रतीक, बहुजन प्रतिपालक राजाधिराज छत्रपति शिवाजी महाराज के संबंध में यह कहना कि वे युद्धों से थककर अपना मुकुट किसी और को सौंपना चाहते थे, न केवल ऐतिहासिक रूप से असत्य है, बल्कि उनके अदम्य साहस और स्वाभिमान का घोर अपमान भी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मुँहबोले छोटे भाई’ धीरेन्द्र द्वारा नागपुर में ऐसे मंच से, जहाँ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की उपस्थिति में इस प्रकार का बयान दिया जाना, भाजपा-आरएसएस की उसी सोच का परिणाम है, जहाँ बहुजन नायकों के योगदान को कमतर दिखाने, उनके संघर्ष को कमजोर करने और उनके व्यक्तित्व को विकृत करने की कोशिश लगातार की जाती रही है।
परम प्रतापी योद्धा, अद्भुत साहस, दूरदर्शी रणनीति और जनकल्याणकारी शासन के प्रतीक, बहुजन प्रतिपालक राजाधिराज छत्रपति शिवाजी महाराज के संबंध में यह कहना कि वे युद्धों से थककर अपना मुकुट किसी और को सौंपना चाहते थे, न केवल ऐतिहासिक रूप से असत्य है, बल्कि उनके अदम्य साहस और स्वाभिमान… pic.twitter.com/lmUeRAW6KS
— Chandra Shekhar Aazad (@BhimArmyChief) April 26, 2026
Chandrashekhar Azad on Dhirendra Shastri: चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि इतिहास साक्षी है कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने विपरीत परिस्थितियों में भी कभी हार नहीं मानी। उनका जीवन त्याग, संघर्ष और आत्मसम्मान की सर्वोच्च मिसाल है-न कि थककर पीछे हट जाने की कहानी। ऐसे भ्रामक और असत्य बयानों के माध्यम से न केवल समाज को गुमराह किया जा रहा है, बल्कि नई पीढ़ी के सामने इतिहास की विकृत तस्वीर प्रस्तुत की जा रही है। यह सीधे-सीधे हमारे महापुरुषों के गौरव को ठेस पहुँचाने का प्रयास है। हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि बहुजन समाज अपने महापुरुषों के सम्मान के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। इस बयान के लिए धीरेंद्र पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। छत्रपति शिवाजी महाराज केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, स्वाभिमान और बहुजन अस्मिता के जीवंत प्रतीक हैं। उनके गौरव को ठेस पहुँचाने वाली किसी भी सोच और साजिश को देश का जागरूक समाज कभी स्वीकार नहीं करेगा।
इधर धीरेंद्र शास्त्री ने अपने बयान पर विवाद बढ़ने पर सफाई दी है। “हम परसों यहां आए थे। हमें भारत दुर्गा माता मंदिर के भूमिपूजन कार्यक्रम में शामिल होने का सौभाग्य मिला, जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्यक्रम था। कल से कुछ लोग सोशल मीडिया पर हमारे बयान को अलग तरीके से पेश कर रहे हैं… हमें इसका बहुत दुख और खेद है… इस देश में आज जो भी सनातनी जिंदा हैं, अगर वे हिंदुत्व के प्रति प्रतिबद्ध हैं, तो उसका सबसे बड़ा श्रेय छत्रपति वीर शिवाजी महाराज को जाता है। हमें दुख है कि जो लोग छत्रपति वीर शिवाजी का सम्मान करते हैं, वे हमारे ही अपने लोग हैं। हम भी छत्रपति शिवाजी को मानते हैं और वे भी मानते हैं। अगर हम आपस में ही लड़ेंगे, तो दूसरों को मौका मिल जाएगा… अगर किसी को हमारी बात से ठेस पहुंची है, तो हम दिल से क्षमा चाहते हैं। हम यह भी निवेदन करते हैं कि हमारे शब्दों को गलत तरीके से प्रस्तुत न किया जाए। क्योंकि हम छत्रपति शिवाजी के लिए जीते हैं और उन्हीं के लिए मरते हैं। हमारा जीवन भी उनके स्वराज की स्थापना के लिए है और हिंदू राष्ट्र की जो विचारधारा हमने ली है, वह भी हमने उन्हीं से ली है…”
#WATCH | Nagpur, Maharashtra: On his remarks on Chhatrapati Shivaji Maharaj, Bageshwar Dham Peethadhish Dhirendra Krishna Shastri says, “We arrived the day before yesterday. We had the privilege of attending the groundbreaking ceremony at the Bharat Durga Mata Temple, a Rashtriya… pic.twitter.com/LOC02FiNGU
— ANI (@ANI) April 26, 2026