नयी दिल्ली, 23 जून (भाषा) घरेलू बिल्लियों के मस्तिष्क में उम्र बढ़ने के साथ होने वाले बदलाव मनुष्यों में होने वाले बदलावों से मिलते-जुलते हैं, लिहाजा इससे मनुष्यों में उम्र बढ़ने और उससे जुड़ी बीमारियों के शोध के नए अवसर मिल सकते हैं। एक नए शोध में यह बात सामने आई है।
ब्रिटेन के बाथ विश्वविद्यालय, अमेरिका के ऑबर्न पशु चिकित्सा कॉलेज विश्वविद्यालय और फ्रांस के टूलूज राष्ट्रीय पशु विद्यालय के वैज्ञानिकों ने कहा कि बिल्लियों की उम्र मनुष्यों की तुलना में कम होती है, इसलिए उम्र बढ़ने को प्रभावित करने वाले कारकों का शोध बिल्लियों में मनुष्यों की तुलना में कहीं तेजी से किया जा सकता है।
शोधकर्ताओं ने कहा कि अभी तक शोध मुख्य रूप से प्रयोगशाला के जानवरों पर निर्भर करता है।
उन्होंने कहा कि इन जानवरों में बीमारियां कृत्रिम रूप से पैदा की जाती हैं और उनकी उम्र भी सीमित होती है।
शोध दल ने मनुष्यों, बिल्लियों और अन्य स्तनधारी प्रजातियों से जुड़े 3,754 ‘डेटा प्वाइंट’ का शोध किया। इनमें मस्तिष्क की इमेजिंग, रक्त की रासायनिक जांच और बीमारियों से जुड़े पैटर्न शामिल थे।
शोधकर्ताओं ने शोध में लिखा, ‘‘बिल्लियां मानव उम्र बढ़ने के शोध के लिए उपयोगी साबित हो सकती हैं, क्योंकि कुछ प्रमाण बताते हैं कि उनमें मनुष्यों जैसी उम्र बढ़ने की प्रक्रियाएं विकसित हो सकती हैं।’’
पालतू और कॉलोनी में रहने वाली बिल्लियों के मस्तिष्क के एमआरआई स्कैन का उपयोग करके उम्र बढ़ने से जुड़े बदलावों के बारे में जानकारी जुटाई गई। इनमें मस्तिष्क का सिकुड़ना, मस्तिष्क में द्रव से भरी जगहों (वेंट्रिकल्स) का फैलना और अन्य परिवर्तन शामिल थे।
शोधकर्ताओं ने कहा, ‘बिल्लियों और मनुष्यों के मस्तिष्क में उम्र बढ़ने के साथ होने वाले क्षय (एट्रोफी) के पैटर्न एक जैसे दिखाई देते हैं। हमने मस्तिष्क में होने वाले सामान्य बदलावों और स्वास्थ्य से जुड़े अन्य मापदंडों का उपयोग करके जीवन के विभिन्न चरणों की तुलना की। उदाहरण के लिए, 80 वर्ष का इंसान लगभग 15 वर्ष की बिल्ली के बराबर होता है।’
ये मस्तिष्कीय बदलाव उन स्थितियों में पाए जाते हैं जो आमतौर पर उम्र बढ़ने से जुड़ी होती हैं। मनुष्यों और अधिक उम्र की बिल्लियों, दोनों में जीवन के अंतिम वर्षों में उम्र से संबंधित तंत्रिका-क्षय (न्यूरोडीजेनेरेटिव) परिवर्तन विकसित हो सकते हैं।
शोध की प्रमुख शोधकर्ता और लेखिका ब्रायर रिग्बी डेम्स ने कहा, ‘यह देखना दिलचस्प था कि बिल्लियों में भी उम्र बढ़ने के साथ मस्तिष्क के सिकुड़ने के वही पैटर्न दिखाई देते हैं जो मनुष्यों में देखे जाते हैं। ये नतीजे इस बात के और सबूत देते हैं कि पालतू जानवरों का अध्ययन करके उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है।’
शोधकर्ताओं ने उम्र से जुड़े मापनीय बदलावों के आधार पर एक जैविक मॉडल तैयार किया। इससे पता चला कि दोनों प्रजातियों में उम्र बढ़ने की प्रक्रिया लगातार एक जैसी गति से नहीं चलती, बल्कि जीवन के अलग-अलग चरणों में कभी तेज और कभी धीमी हो जाती है।
शोध दल को पता चला कि किशोरावस्था के अंतिम चरण (मिड-टीन्स) में पहुंची एक बिल्ली की उम्र लगभग 80 वर्ष के इंसान के बराबर होती है।
इसके अलावा, जीवन के अंतिम चरणों में दोनों प्रजातियों के उम्र बढ़ने के पैटर्न काफी हद तक एक-दूसरे से मेल खाते हैं और सभी जानवर मनुष्यों की वृद्धावस्था के बराबर उम्र तक नहीं पहुंचते, लेकिन घरेलू बिल्लियां पहुंच जाती हैं।
भाषा जोहेब सुरेश
सुरेश