अंबिकापुर (छत्तीसगढ़), 28 मई (भाषा) छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में एक राजस्व अधिकारी पर कथित तौर पर हमला करने और उसके शासकीय काम में बाधा डालने के आरोप में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के विधायक रामकुमार टोप्पो तथा उनके समर्थकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि जिले के राजापुर इलाके में नायब तहसीलदार के पद पर तैनात अधिकारी तुषार मानिक के खिलाफ भी एक अलग मामला दर्ज किया गया है। उन पर टोप्पो की चचेरी बहन सीमा धनकी के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार करने का आरोप है।
पुलिस ने बताया कि ये दोनों घटनाएं सीतापुर पुलिस थाना क्षेत्र के राजापुर इलाके में हुईं।
सीतापुर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले टोप्पो से बार-बार संपर्क करने की कोशिशों के बावजूद, इस मामले पर उनकी प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी।
एक अधिकारी ने बताया कि बुधवार रात अंबिकापुर पुलिस थाने में टोप्पो, उनके समर्थकों यूसुफ, नाजिम रजा, पंकज गुप्ता और 10-12 अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।
उन्होंने बताया कि यह मामला ‘जीरो प्राथमिकी’ के तौर पर दर्ज किया गया था और बाद में आगे की जांच के लिए सीतापुर पुलिस थाने को सौंप दिया गया, क्योंकि यह घटना वहीं हुई थी।
अपनी शिकायत में, मानिक ने आरोप लगाया कि जब वह अपने सरकारी कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे थे, तब विधायकों और उनके समर्थकों ने उन पर तुरंत ‘शोध क्षमता प्रमाण पत्र’ (सॉल्वेंसी सर्टिफिकेट) पर हस्ताक्षर करने का दबाव डाला।
उन्होंने बताया कि उन्होंने संबंधित व्यक्ति से कहा था कि प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर करने से पहले उचित सत्यापन के लिए सभी दस्तावेज 28 मई को उनके कार्यालय में लेकर आएं।
अधिकारी ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने तुरंत बात मानने से इनकार किया, तो टोप्पो ने उनके साथ गाली-गलौज की और अपने समर्थकों के साथ मिलकर उन पर हमला किया और उन्हें जमीन पर पटक दिया।
मानिक ने अपनी शिकायत में कहा, ‘सीतापुर के एसडीएम मौके पर मौजूद थे और उन्होंने मुझे वहां से बचाया, वरना कोई अप्रिय घटना घट सकती थी।’
एक अधिकारी ने बताया कि विधायक की चचेरी बहन सीमा धनकी की शिकायत के आधार पर, मानिक के खिलाफ भी अश्लील हरकतें और धमकी समेत बीएनएस की अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
धनकी ने आरोप लगाया कि वह बुधवार को राजापुर उप-तहसील कार्यालय में प्रमाण पत्र जारी करने का अनुरोध करने गई थी, लेकिन मानिक गुस्सा हो गया, उसे गालियां दीं, अश्लील इशारे किए और उसे धक्का देकर कार्यालय से बाहर निकाल दिया।
उसने आरोप लगाया कि अधिकारी ने उसके आदिवासी समुदाय के खिलाफ जातिवादी टिप्पणियां की और अपने कर्मचारियों को निर्देश दिया कि उसे कार्यालय के अंदर न आने दें।
अधिकारी ने बताया कि दोनों मामलों में अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है और पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत ने बुधवार को कहा था कि दोनों पक्षों की ओर से शिकायतें दर्ज कराई गई हैं और पुलिस जांच के बाद आगे की कार्रवाई करेगी।
बुधवार रात संवाददाताओं से बात करते हुए, मानिक ने महिला से दुर्व्यवहार के आरोपों से इनकार किया और कहा कि महिला ने प्रक्रियागत आवश्यकताओं के बावजूद, उनसे दस्तावेज पर तुरंत हस्ताक्षर करने की जिद की थी।
अधिकारी ने बताया कि बाद में विधायक के निजी सहायक ने उन्हें फोन किया और राजपुर में विधायक से मिलने के लिए कहा, इसलिए वह एसडीएम सिन्हा के साथ वहां गए।
माणिक ने आरोप लगाया, ‘विधायक 10-20 समर्थकों के साथ खड़े थे। उनके कुछ समर्थकों ने मुझ पर हमला किया। फिर विधायक ने मुझे बाहर खींच लिया। उन्होंने उस महिला को बुलाया, जिसे उनकी चचेरी बहन बताया जाता है। फिर विधायक ने भी मुझ पर हमला किया। एसडीएम ने बीच-बचाव किया और मुझे बचाया।’
भाषा सं संजीव
मनीषा
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