कैलाश मानसरोवर यात्रा के पहले जत्थे को मुख्यमंत्री धामी ने टनकपुर से रवाना किया

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कैलाश मानसरोवर यात्रा के पहले जत्थे को मुख्यमंत्री धामी ने टनकपुर से रवाना किया

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  • Publish Date - July 5, 2026 / 04:41 PM IST,
    Updated On - July 5, 2026 / 04:41 PM IST

चंपावत/पिथौरागढ़, पांच जुलाई (भाषा) उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे के जरिए कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के पहले जत्थे को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को चंपावत जिले के टनकपुर से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

इस मौके पर ‘हर-हर महादेव’ एवं ‘बम-बम भोले’ के जयघोष के बीच मुख्यमंत्री ने तीर्थयात्रियों का रुद्राक्ष की माला एवं भगवान शिव का पटका पहनाकर स्वागत किया तथा उनकी मंगलमय यात्रा की कामना की। उन्होंने श्रद्धालुओं से संवाद भी किया।

अधिकारियों के मुताबिक, 49 श्रद्धालुओं का पहला जत्था दिल्ली से चलकर शनिवार शाम को टनकपुर पहुंचा था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कैलाश मानसरोवर यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रीय समरसता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भगवान भोलेनाथ की कृपा से ही श्रद्धालुओं को इस पवित्र यात्रा का अवसर प्राप्त होता है।

यात्रा को सीमांत क्षेत्रों के लिए भी विकास और समृद्धि का माध्यम बताते हुए धामी ने कहा कि यह यात्रा सीमांत गांवों की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और स्थानीय जीवन से देशभर के लोगों को जोड़ती है। मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं से स्थानीय हस्तशिल्प एवं उत्पादों की खरीद कर स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाने का आह्वान किया।

इससे पहले, टनकपुर पहुंचने पर श्रद्धालुओं का छोलिया नृत्य, पुष्पवर्षा, फूल-मालाओं के साथ स्वागत किया गया।

टनकपुर में शारदा पर्यटक आवास गृह के प्रबंधक मनोज कुमार ने बताया कि प्रथम दल में एक चिकित्सक सहित कुल 49 तीर्थयात्री शामिल हैं, जिनमें 34 पुरुष एवं 15 महिलाएं हैं। उन्होंने कहा कि दल में आंध्र प्रदेश, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड के श्रद्धालु शामिल हैं।

राजस्थान के 68 वर्षीय श्रद्धालु पुरुषोत्तम खंडेलवाल दल के सबसे वरिष्ठ तीर्थयात्री हैं, जबकि गुजरात के 21 वर्षीय हरिकृष्णा सबसे युवा श्रद्धालु हैं।

श्रद्धालुओं का दल टनकपुर से चलकर रविवार शाम को पिथौरागढ़ जिले में स्थित आधार शिविर धारचूला पहुंचेगा और वहीं रात्रि विश्राम करने के बाद सोमवार की सुबह अगले पड़ाव गुंजी के लिए रवाना होगा।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री धामी के प्रयासों से लगातार दूसरे वर्ष कैलाश मानसरोवर यात्रा का संचालन टनकपुर मार्ग से किया जा रहा है जो पहले की अपेक्षा अधिक सुगम है। इससे पहले, दिल्ली से चलकर श्रद्धालु हल्द्वानी पहुंचते थे और वहां से अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ होते हुए धारचूला पहुंचते थे।

उधर, पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी आशीष भटगईं ने बताया कि जिले में श्रद्धालुओं के खाने-पीने, ठहरने, स्वास्थ्य जांच और यात्रा के दौरान सुरक्षा से जुड़ी सभी तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं।

कैलाश मानसरोवर यात्रा की नोडल एजेंसी कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) द्वारा तैयार यात्रा कार्यक्रम के अनुसार, श्रद्धालुओं का पहला जत्था 10 जुलाई को लिपुलेख दर्रा पारकर तिब्बत पहुंचेगा और वहां कैलाश पर्वत के दर्शन और मानसरोवर झील की परिक्रमा पूरी करने के बाद 18 जुलाई को भारत लौट आएगा।

भाषा सं दीप्ति शफीक

शफीक