नयी दिल्ली, 29 जून (भाषा) जंतर-मंतर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का विरोध प्रदर्शन सोमवार को दसवें दिन में प्रवेश कर गया। इस दौरान सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके ने छात्रों के हालिया आत्महत्या मामलों का उल्लेख करते हुए सरकार की कथित उदासीनता की आलोचना की और प्रभावित परिवारों से संपर्क नहीं करने का आरोप लगाया।
दीपके ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कई पोस्ट में छात्रों—प्रदीप मेघवाल, आकांक्षा चतुर्वेदी, अमायरा कुमार और कहान पटेल—के नाम लेते हुए कहा कि उनके परिवारों को ‘‘न्याय के लिए भीख मांगने’’ की स्थिति में छोड़ दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बच्चों की मौत पर सरकार के किसी भी प्रतिनिधि ने उनके परिवारों से संपर्क करके खेद तक व्यक्त नहीं किया।
दीपके ने कहा, ‘‘मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि सत्ता में बैठे लोग इतने उदासीन और अहंकारी कैसे हो सकते हैं कि उन्हें उन परिवारों से सम्पर्क करने की भी जरूरत महसूस नहीं होती, जिन्होंने अपने बच्चों को खो दिया है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘आप उनके बच्चों को वापस नहीं ला सकते, लेकिन कम से कम इतना तो कर सकते हैं कि उनके परिवारों से मिलकर खेद व्यक्त करें और माफी मांगें। क्या यह भी बहुत ज्यादा है?’’
दीपके ने गुजरात के नीट अभ्यर्थी कहान पटेल के पिता से उनकी बातचीत का एक वीडियो भी साझा किया। पटेल ने 18 जून को आत्महत्या कर ली थी। उसके पिता केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के समक्ष अपनी चिंता जताने के लिए गुजरात से जंतर-मंतर पहुंचे थे।
जंतर मंतर पर दिए बयान में पिता ने सवाल उठाया कि उनके बेटे को किस तरह पेश किया जा रहा है और कहा कि परिवार चाहता है कि लोग वास्तव में उनके बेटे को समझें।
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी अपने अनशन के दूसरे दिन लोगों से सीजेपी और लद्दाख से जुड़े मुद्दों पर समर्थन जताते हुए उपवास में शामिल होने की अपील की।
उन्होंने कहा, ‘‘यह सीजेपी और लद्दाख के समर्थन में मेरे अनशन का दूसरा दिन है। आप भी हमारे साथ शामिल हो सकते हैं। यदि यहां नहीं आ सकते तो शिक्षा, जवाबदेही और पर्यावरण सुधार के समर्थन में उपवास रखकर एकजुटता दिखाएं। देश को बेहतर बनाने के लिए पूरे भारत के लोगों को साथ आना चाहिए।’’
वांगचुक ने रविवार को जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया था जो सीजेपी की तरह परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं और विशेष रूप से नीट से जुड़े मामलों में जवाबदेही तथा शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग से जुड़ा है।
सीजेपी का यह प्रदर्शन 20 जून से जारी है और इसके केंद्र में परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताएं हैं। अभिजीत दीपके ने कहा है कि यह आंदोलन केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों—जैसे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर)—तक भी विस्तारित होगा।
इस आंदोलन को छात्रों और नागरिक समाज के सदस्यों का भी समर्थन मिला है।
जंतर-मंतर पर जारी विरोध प्रदर्शन में एआईएसए से जुड़े छह छात्र मुख्य मंच से अलग एक मंच पर अपना अनशन जारी रखे हुए हैं। इनमें नेहा (एआईएसए की अखिल भारतीय अध्यक्ष), दानिश (जेएनयूएसयू संयुक्त सचिव), मनीष (एआईएसए उत्तर प्रदेश अध्यक्ष), दीपक (दिल्ली विश्वविद्यालय एआईएसए उपाध्यक्ष), ऋषिकेश (जेएनयू के बराक हॉस्टल अध्यक्ष) और अमीन (एयूडी छात्र परिषद के पूर्व सीसी सदस्य) शामिल हैं।
देर रात रविवार को दीपके ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक के लिए पोर्टेबल शौचालय की सुविधा देने से इनकार कर दिया और कहा कि जंतर-मंतर के सार्वजनिक शौचालयों में पानी की आपूर्ति नहीं है।
उन्होंने एक व्यक्ति का टिकट भी साझा किया जो बिहार से प्रदर्शन में शामिल होने आया था।
भाषा अमित नरेश
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