वीआईपी काफिले के कारण गर्भवती महिला के फंसे होने का दावा झूठा निकला: बेंगलुरु पुलिस

वीआईपी काफिले के कारण गर्भवती महिला के फंसे होने का दावा झूठा निकला: बेंगलुरु पुलिस

वीआईपी काफिले के कारण गर्भवती महिला के फंसे होने का दावा झूठा निकला: बेंगलुरु पुलिस
Modified Date: June 2, 2026 / 11:00 am IST
Published Date: June 2, 2026 11:00 am IST

बेंगलुरु, दो जून (भाषा) बेंगलुरु पुलिस ने मंगलवार को कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो के सत्यापन में पता चला है कि जिस व्यक्ति ने अति विशिष्ट व्यक्ति (वीआईपी) की आवाजाही के कारण गर्भवती पत्नी के यातायात में फंसे होने का दावा किया था, वह वास्तव में वाहन में अकेले यात्रा कर रहा था।

इसके साथ ही पुलिस ने लोगों से किसी भी मामले को सनसनीखेज बनाने से पहले तथ्यों की जांच करने की भी अपील की।

यह घटना रविवार की है और सोशल मीडिया पर उस समय व्यापक आक्रोश देखने को मिला जब यह दावा किया गया कि राज्यपाल के काफिले की आवाजाही के लिए ‘ओल्ड एयरपोर्ट रोड’ पर यातायात रोक दिया गया था।

यह स्पष्टीकरण उस वीडियो की जांच शुरू किए जाने के एक दिन बाद आया है, जिसमें एक व्यक्ति को ‘ओल्ड एयरपोर्ट रोड’ पर बैठे देखा जा सकता है। वीडियो में वह दावा कर रहा था कि वीआईपी आवाजाही के कारण लगाए गए यातायात प्रतिबंध की वजह से उसकी गर्भवती पत्नी कार में फंस गयी है ।

वायरल घटना के संबंध में बेंगलुरु पुलिस ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी एक पोस्ट में कहा कि जांच के दौरान पता चला कि संबंधित व्यक्ति वाहन में अकेला सफर कर रहा था।

पुलिस ने कहा, ‘‘हम यह दोहराना चाहते हैं कि सड़क पर किसी भी परिस्थिति में एंबुलेंस और चिकित्सकीय आपात स्थितियों को हमेशा प्राथमिकता दी जाती है।’’

पुलिस ने लोगों से किसी भी मामले को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने या साझा करने से पहले तथ्यों की पुष्टि करने का आग्रह किया। साथ ही चेतावनी दी कि झूठी खबर फैलाने वालों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

‘एक्स’ पर एक उपयोगकर्ता द्वारा साझा किए गए वीडियो में एक व्यथित वाहन चालक पुलिसकर्मियों के सामने सड़क पर बैठा दिखाई दे रहा था। यह वीडियो बाद में तेजी से वायरल हो गया।

पुलिस अधिकारियों के हस्तक्षेप करने पर उसने कथित तौर पर वहां से हटने से इनकार कर दिया और दावा किया कि उसकी गर्भवती पत्नी कार में है तथा उसे तत्काल चिकित्सीय सहायता की आवश्यकता है।

उसने यह सवाल भी उठाया था कि आम लोगों की आपात परिस्थितियों की तुलना में वीआईपी आवाजाही को प्राथमिकता क्यों दी जाती है।

भाषा खारी रंजन

रंजन


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