कॉजपा का धरना: झड़प में जख्मी हुए लोगों ने बयां किया दर्द

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कॉजपा का धरना: झड़प में जख्मी हुए लोगों ने बयां किया दर्द

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  • Publish Date - July 22, 2026 / 08:21 PM IST,
    Updated On - July 22, 2026 / 08:21 PM IST

(मानसी जगानी)

नयी दिल्ली, 22 जुलाई (भाषा) दिल्ली के जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के प्रदर्शन में अलीगढ़ की एक नर्सिंग छात्रा प्राथमिक उपचार का सामान लेकर पहुंची है और उसने उन लोगों की मदद की जो सोमवार को पुलिस के साथ झड़प में जख्मी हो गए थे।

दिल्ली पुलिस के अनुसार, कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) द्वारा आयोजित संसद मार्च के दौरान सोमवार को हुई झड़पों में कम से कम 60 प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं। यह मार्च परीक्षाओं में अनियमितताओं और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर किया गया था।

उन्नीस वर्षीय नगमा परवीन अलीगढ़ से प्राथमिक उपचार की एक छोटी थैली लेकर आई थी। नर्सिंग छात्रा होने के नाते, उसने अन्य घायल प्रदर्शनकारियों की मदद की। हालांकि बैरिकेड पर धकेले जाने और जमीन पर गिरने के बाद उसके पैर में ‘फ्रैक्चर’ हो गया।

वहीं, खाना पहुंचाने का काम करने वाले 22 वर्षीय राकेश कुमार अपनी पाली पूरी करने के बाद प्रदर्शन में शामिल हुए। गाजियाबाद निवासी राकेश ने कहा कि उनका छोटा 18 वर्षीय भाई नीट की परीक्षा की तैयारी कर रहा है, और वह उन छात्रों के साथ खड़े होने आए थे जिन्होंने अपनी जान गंवाई है। उन्होंने कहा कि वह उन लोगों का भी समर्थन करते हैं जो उनके भाई की तरह अगले साल नीट परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं।

कुमार ने कहा कि लाठीचार्ज के दौरान वह जमीन पर गिर पड़े थे और उन्हें पीटा गया और घायल हो गए।

उन्होंने कहा, ‘पहले मुझे लगा कि किसी ने मुझे डंडे से मारा है। जब मेरी कमीज गीली हो गई, तो मैंने नीचे खून बहता देखा।’ उन्होंने आरोप लगाया कि लाठी में कीलें लगी हुई थीं।

एक अन्य प्रदर्शनकारी 28 वर्षीय तलहा पिछले हफ्ते शुक्रवार को पटना से दिल्ली आए थे। एक दिन बाद, कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को पुलिस ने जबरन सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया।

उन्होंने कहा कि वह बेरोजगारी और महंगाई को लेकर जंतर-मंतर पर दिए जा रहे धरने में आए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि सोमवार के प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उन्हें पीटा और उनके दाहिने पैर में ‘फ्रैक्चर’ हो गया।

तलहा ने कहा, ‘मैं और मेरा दोस्त अंकित यहां ट्रेन से आए थे। केवल मेरी मां को पता था कि मैं यहां हूं। शनिवार की घटना के बाद वह पहले से ही आशंकित थीं, लेकिन प्रदर्शन के वीडियो देखने के बाद वह मुझे लगातार फोन कर रही हैं। मैं उनसे क्या कहूं? प्रदर्शन के दौरान जो हुआ वह सही नहीं था। क्या पुलिसकर्मियों के परिवार नहीं होते?’

अनिकेत नामक व्यक्ति ने बताया कि गुरुग्राम निवासी 25 वर्षीय शेख इरफद मंसूरी कनॉट प्लेस में प्रदर्शन में शामिल हुए थे, तभी आरपीएफ कर्मी द्वारा चलाई गई कथित ‘पैलेट’ से वह घायल हो गए।

मंसूरी को सोमवार शाम करीब पांच बजे लेडी हार्डिंग अस्पताल लाया गया और चेहरे पर पैलेट की सात चोटें आने के बाद मंगलवार को उनकी सर्जरी हुई।

अनिकेत ने कहा, ‘पैलेट उनकी नाक, माथे, दोनों आंखों और गालों पर लगे। जब हम कल उन्हें अस्पताल लाए तो वह होश में थे। वह फिलहाल एनेस्थीसिया के प्रभाव में हैं।’

हालांकि दिल्ली पुलिस ने अपने कर्मियों द्वारा मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन का इस्तेमाल किए जाने के दावों को मंगलवार को खारिज कर दिया, लेकिन इस बात की कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है कि आरपीएफ कर्मियों ने पैलेट गन का इस्तेमाल किया था या नहीं।

आरएमएल अस्पताल में, 21 वर्षीया साक्षी जंतर-मंतर और टॉलस्टॉय मार्ग के पास भगदड़ जैसी स्थिति में लगी चोटों से उबर रही हैं।

छतरपुर एक्सटेंशन की रहने वाली साक्षी के चेहरे, छाती और गर्दन में चोटें आईं और उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया।

बुधवार को अस्पताल के अधिकारियों ने बताया कि उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट से हटा दिया गया है। वह होश में है। उन्होंने बताया कि उनके मस्तिष्क और रीढ़ के एमआरआई स्कैन सामान्य थे।

भाषा नोमान नोमान अविनाश

अविनाश